रीवा में होंगे विकसित दो नए टूरिस्ट सर्किट

रीवा में होंगे विकसित दो नए टूरिस्ट सर्किट

भोपाल। रीवा शहर से लेकर पूरा जिला प्राकृतिक एवं पुरातात्विक स्थलों से भरा है। यहां पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई नई योजनाएं बनाई गई हैं। इस साल पर्यटन पर फोकस रहेगा। जिला प्रशासन ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत आने वाले समय में पर्यटकों को रीवा में आकर्षित करने के साथ ही यहां पर संसाधनों में वृद्धि करने की तैयारी है। जिले में धार्मिक महत्व के स्थलों के साथ ही पुरातात्विक महत्व के कई स्थल मौजूद हैं। पहाड़, नदियों और जलप्रपातों की भी बड़ी श्रृंखला है। इन सभी स्थानों की अब प्रशासनिक तौर पर ब्रांडिंग शुरू की गई है। रीवा को टूरिस्ट सर्किट के बड़े केन्द्र के रूप में स्थापित करने की तैयारी है। यहां पर वाराणसी, प्रयागराज, खजुराहो, जबलपुर, चित्रकूट, मैहर, संजय टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ आदि स्थानों पर आने वाले पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर आवागमन और ठहराव की व्यवस्था भी की जाएगी। बाहर से आने वाले पर्यटक यदि इस क्षेत्र में आते हैं तो रीवा में ठहरकर आसपास के प्रमुख स्थलों तक तीन से चार घंटे के बीच ही पहुंच सकते हैं।

रीवा में होंगे विकसित दो नए टूरिस्ट सर्किट
जिले के देउर कोठार में सम्राट अशोक के शांति संदेशों के स्थापित स्तंभ हैं। रीवा-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर मनगवां, गंगेव, गढ़ से आगे बढ़ते हुए कटरा के समीप स्थित देउर कोठार गांव में बौद्ध स्तूप हैं। रीवा से 65 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल बौद्ध अनुयायियों के साथ ही ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थ्लों का भ्रमण करने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख केन्द्र बनाया जा सकता है। यहां तीन बड़े एवं 44 छोटे पाषाण स्तूप हंै। जिसमें पकी ईंटों का भी उपयोग हुआ है। यहां पर उत्खनन से तोरण द्वार, हर्मिका, रेलिंग वेदिका स्तम्भ, सूची, प्रदक्षिणा पथ, अलंकृत शिलापट्ट आदि प्राप्त हुए हैं। यहां से चार ब्राह्मी लिपि (अशोक कालीन) अभिलेख भी मिले हैं। वर्तमान में इसे भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। यह स्थान गौतम बुद्ध की नगरी सारनाथ से मिर्जापुर होते हुए चार घंटे के रास्ते पर है। यहां से प्रयागराज डेढ़ घंटे के रास्ते पर है। जिला प्रशासन ने शासन ने को प्रस्ताव भेजा है। जिसमें कई टूरिस्ट रूट बताए गए हैं। इसमें बताया गया है कि रीवा आने वाले पर्यटक जिले के जिस हिस्से से गुजरेंगे उन्हें पर्यटन स्थल उपलब्ध रहेगा। इन स्थलों को पर्यटन के नक्शे में जोडऩे के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें बेला की ओर से रीवा आने वाले पर्यटकों को पुरवा वाटरफाल, चचाई वाटरफाल, टोंस वाटरफाल, घिनौचीधाम, आल्हाघाट, केवटी वाटरफाल और किला, देउर कोठार होते हुए प्रयागराज जाया जा सकता है। साथ ही यदि बनारस की ओर जाना है तो बहुती वाटरफाल, अष्टभुजा मंदिर, देवतालाब शिवमंदिर होते हुए बनारस पहुंचा जा सकता है। दूसरे रूट में मुकुंदपुर में ह्वाइट टाइगर सफारी, गोविंदगढ़ में किला, मंदिर और तालाब, गुढ़ में भैरव बाबा मंदिर, सोलर पॉवर प्लांट, मोहनिया ट्विन ट्यूब टनल होते हुए संजय नेशनल पार्क सीधी, परसिली रिसार्ट, बांधवगढ़ नेशनल पार्क के बाद जबलपुर पहुंचा जा सकता है।

आने वाले समय में जिले के हर हिस्से में लोग सहजता से पहुंच सकेंगे
रीवा जिले में अब पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। अब तक बाहर से आने वाले पर्यटक जिले के प्रमुख स्थलों तक इसलिए नहीं पहुंच पाते थे क्योंकि सड़कों की स्थिति ठीक नहीं थी। अब जिले में नेशनल हाइवे की संख्या लगातार बढ़ रही है, साथ ही सड़कों का जाल बिछता जा रहा है। हवाई पट्टी को हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। आने वाले समय में जिले के हर हिस्से में लोग सहजता से पहुंच सकेंगे।

बड़े पर्यटन स्थलों की तर्ज होम स्टे की व्यवस्था
रीवा जिले में पहली बार बड़े पर्यटन स्थलों की तर्ज होम स्टे की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए कुछ क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं। वहां के लोगों को तैयार किया जा रहा है कि जिनके पास ऐसे मकान हैं कि वह कुछ दिनों के लिए किराए पर दे सकते हैं। लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी इसके लिए होगी। संबंधित लोगों का पूरा डाटा प्रशासन के पास रहेगा। इसके लिए जवा जनपद के पहाड़ी क्षेत्र के कुछ गांवों को चिन्हित किया गया है। साथ ही त्योंथर के पास के कई गांव हैं। देउर कोठार में घूमा, कटरा के पास कुछ गांवों को चिन्हित किया जा रहा है।

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