पूर्व  विधान सभा उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह को इंदौर भूमि घोटाले में क्लीन चिट

पूर्व  विधान सभा उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह को इंदौर भूमि घोटाले में क्लीन चिट
राजेश द्विवेदी सतना। प्रदेश के पूर्व उद्योग मंत्री ,विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ राजेंद्र कुमार सिंह के लिए अच्छी खबर है। वर्षों से उनके नाम के साथ जुड़े रहे इंदौर भूमि घोटाले में अदालत से उन्हें क्लीन चिट मिल गई है। अदालत ने माना कि जिस जमीन के मामले में लोकायुक्त ने प्रकरण दर्ज किया था वह जमीन अभी शासन के ही पास है। बीते 21 वर्षों से यह मामला डॉ राजेंद्र सिंह के राजनैतिक कैरियर में बैरियर और विरोधियों के लिए एक बड़ा मुद्दा बनता रहा है लेकिन विशेष न्यायालय द्वारा बाइज्जत बरी किये जाने के बाद इसका पटाक्षेप हो गया है। इन्दौर की स्कीम नंबर 54 की 26.5 एकड़ भूमि के मामले में  मामले में 1998 मे लोकायुक्त ने पूर्व मंत्री डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह सहित अन्य 15 लोगों के खिलाफ  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा  13(1)डी, 13(2), 120बी, तथा आईपीसी की धारा 34 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। लगातार 21 साल तक चले इस प्रकरण से जुड़े तमाम दस्तावेजों व साक्षयों के आधार पर  एमपी- एमएलए विशेष  न्यायालय भोपाल ने कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह को दोषमुक्त पाया है। डॉ सिंह के अलावा इस मामले में लोकायुक्त द्वारा आरोपी बनाये गए अन्य 15 लोगों को भी अदालत ने दोष मुक्त करार दिया है। प्रकरण में अदालत ने पाया है कि डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह के कार्यकाल में संपूर्ण भूमि सरकार के अधिपत्य में बनी रही जो आज भी है। क्या था मामला दरअसल इन्दौर विकास प्राधिकरण ने किसी स्कीम नं 54 के तहत प्रायवेट लैण्ड का अधिग्रहण सन 1964 में किया था। उक्त प्रकरण की पीड़ित परिवार ने लोवर कोर्ट में मामले की अपील की थी। सन 1995 में तत्कालीन पर्यावरण मंत्री बीआर यादव ने एक समझौते के तहत 6.5 एकड़ जमीन पीड़ित परिवार को वापस करने का सुझाव दिया था। किन्तु जब इन्दौर विकास प्राधिकरण ने इस पर कोई रुचि नही दिखाई तो पीड़ित परिवार उच्च न्यायाल में मामले की अपील करने चला गया। इस मामले में न्यायालय ने संज्ञान लेते हुये राज्य सरकार को  2 महीने के अन्दर उक्त मामले का निराकरण करने का आदेश दिया। डॉ सिंह ने संबंधित प्रकरण की फाइल में संबंधित अधिकारियों को डिस्कस करने के निर्देश दिए थे। बाद में इसी मामले में लोकायुक्त ने वर्ष 1998 में डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह सहित अन्य 15 लोगों के खिलाफ मामला पंजीबद्व किया था। मौजूदा समय तक यह जमीन सरकार के पास यथावत बनी हुई है जो कभी भी मुक्त नही हुई है। लगातार 21 साल चले इस मामले में कल 16 मई 2019 को डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह सहित अन्य सभी 15 लोगों का बाइज्जत बरी किया गया। हर चुनाव में घेरती थी भाजपा इस मामले को लेकर भाजपा हर विधानसभा चुनाव में पूर्व विस उपाध्यक्ष डा. राजेंद्र सिंह को घेरती रही है। नवंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया। यहां तक कि जब पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पार्टी प्रत्याशी रामखेलावन का चुनाव प्रचार करने अमरपाटन पहुंचे थे तो उनका समूचा चुनावी भाषण इसी मसले को लेकर केंद्रित था। भाजपा उन्हें भ्रष्टाचार में लिप्त बताती रही लेकिन न्यायालय के फैसले ने यह साफ कर दिया कि लोकायुक्त की कार्यवाही त्रुटिपूर्ण थी। भाजपा ने लोकायुक्त के इस प्रकरण को लेकर अब तक विभिन्न पदों में रहे राजेंद्र कुमार सिंह से इस्तीफा भी मांगती रही है। कांग्रेस के अंदर भी डॉ सिंह के विरोधी इस मुद्दे को उनके खिलाफ जब -तब इस्तेमाल करते रहे हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष बनाए जाने पर भी भाजपा ने उन्हें घेरने की कोशिश की थी और इस्तीफा मांगा था लेकिन तब भी उन्होंने बड़े आत्मविश्वास के साथ उसे ठुकरा दिया था। तब उन्होंने कहा था कि जमीन की बिक्री और भूमि उपयोग परिवर्तन का फैसला हाईकोर्ट के निर्देश पर लिया गया था। फाइल पर ह्यप्लीज डिस्कसह्ण लिखने पर ईओडब्ल्यू ने आरोपी बनाया था । चूंकि यह कार्रवाई पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण है, अत: विधानसभा उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि मामला इस पद के दुरुपयोग का नहीं है। उनके द्वारा कहे गए इसकथन की पुष्टि भी न्यायालय से आए फैसले पर हो गई।