vinod upadhyay
भोपाल। 23 मई को कमल मुरझाए या न मुरझाए, लेकिन उसके बाद मप्र में कई मंत्रियों का चेहरा जरूर मुरझा सकता है। क्योंकि कांग्रेस के दर्जनभर से अधिक प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री कमलनाथ और संगठन को शिकायत भेजी है कि उनके संसदीय क्षेत्र के मंत्री प्रचार के दौरान निष्क्रिय रहे। इस कारण सीट पर कांग्रेस की हार हो सकती है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 22 लोकसभा सीटों को जितने का लक्ष्य तय कर मंत्रियों को लोकसभावार जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन कई मंत्री अपने जिले की बजाय दूसरे जिले में सक्रिय रहे।
22 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य
विधानसभा चुनाव में मिली जीत की संजीवनी के बाद कांग्रेस आलाकमान को मप्र से काफी उम्मीदें हैं। इसलिए कांग्रेस ने मप्र में लोकसभा चुनाव भी कमलनाथ के चेहरे पर लड़ा है। आलाकमान को विश्वास है कि पूरी कांग्रेस को एकजुट करके कमलनाथ ने जिस तरह भाजपा की 15 साल से जमी जमाई सरकार को उखाड़ फेंका है, उसी पर लोकसभा चुनाव में भी ऐतिहासिक जीत दिलाएंगे। इसके लिए आलाकमान ने कम से कम 22 सीट का लक्ष्य रखा है। लोकसभा की 22 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य तय करने वाली कांग्रेस ने मंत्रियों को अपने गृह जिले की सीट जिताने की जिम्मेदारी सौंपी है।
प्रदेश सरकार के 28 मंत्री 18 जिलों से आते हैं। बाकी 34 जिलों की जिम्मेदारी विधायकों और पदाधिकारियों को सौंपी गई है। पार्टी के निर्देशानुसार जिले में जितने कांग्रेस विधायक हैं, वे एक टीम की तरह काम करेंगे। इन 34 जिलों के प्रभारी मंत्री भी उन विधायकों की टीम में शामिल किए गए है। इन जिलों के प्रभारी मंत्रियों को गृह जिले के साथ ही ये अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन मंत्रियों को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देशानुसार अपने जिले में ही काम करने को कहा गया है। मंत्री प्रभार वाले जिले में केवल रणनीति बनाने में शामिल होंगे।
किस मंत्री के पास कौन-सा जिला
विजयलक्ष्मी साधौ- खरगोन, धार, बड़वानी
बाला बच्चन-खरगोन, इंदौर
सज्जन सिंह वर्मा- देवास, उज्जैन, खरगोन
डॉ. गोविंद सिंह- भिंड
पीसी शर्मा-भोपाल, होशंगाबाद, हरदा
आरिफ अकील- भोपाल, सीहोर, भिंड
लाखन सिंह यादव- ग्वालियर, श्योरपुर, मुरैना
इमरती देवी- ग्वालियर, गुना
प्रद्युम्न सिंह तोमर- ग्वालियर, शिवपुरी
जीतू पटवारी- इंदौर, शाजापुर, देवास
तुलसीराम सिलावट- इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर
हर्ष यादव- सागर, रायसेन, विदिशा
गोविंद सिंह राजपूत- सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी
लखन घनघोरिया - जबलपुर, रीवा, सतना
तरुण भनोत- जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडोरी
उमंग सिंघार- धार, ग्वालियर
सुरेंद्र सिंह बघेल- धार, झाबुआ, अलीराजपुर
प्रियव्रत सिंह - राजगढ़, जबलपुर, कटनी
जयवद्र्धन सिंह- राजगढ़, आगर-मालवा
महेंद्र सिंह सिसौदिया- गुना, अशोकनगर
बृजेंद्र सिंह राठौर- टीकमगढ़, सागर, छतरपुर
प्रदीप जायसवाल- बालाघाट, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर
हुकुम सिंह कराड़ा- शाजापुर, मंदसौर, नीमच
ओमकार सिंह मरकाम- डिंडौरी, शहडोल, उमरिया
डॉ. प्रभुराम चौधरी - रायसेन, पन्ना, दमोह
सुखदेव पांसे- बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी
कमलेश्वर पटेल - सीधी, बालाघाट, बैतूल
सचिन यादव- खरगोन, रतलाम
कई मंत्रियों-विधायकों की निष्क्रियता चर्चा में
लोकसभा चुनाव में भले ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने मंत्रियों और विधायकों को उनके क्षेत्रों में सक्रिय कर दिया है, लेकिन मंत्रियों की बेरुखी चिंता का कारण भी बन गई है। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि कई लोकसभा प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री से शिकायत की है कि जिम्मेदारी मिलने के बाद भी मंत्री और विधायकों को सहयोग नहीं मिला है। यही नहीं कुछ मंत्री तो ऐसे थे जो अपने गृह जिले की जिम्मेदारी छोड़कर अपने चहेते नेता के लिए दूसरे जिले में जाकर प्रचार करते रहे।
मिली शिकायतों के बाद कमलनाथ ने लोकसभा क्षेत्रों को लेकर स्थानीय नेताओं से चर्चा की। इस दौरान ज्यादातर मंत्रियों की शिकायत आई थी कि वे पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ही नहीं प्रत्यायाी तक के फोन ही नहीं उठाते हैं। कई मंत्रियों के बारे में तो यह तक भी कहा गया था कि वे लोगों से मेल-मुलाकात नहीं करते। उसके बाद मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को चेतावनी दी थी कि उनकी लापरवाही उन पर भारी पड़ सकती है।
इस मामले में एक मंत्री का कहना है कि भले ही हमें अपने जिले में काम करने का निर्देश मिला है। लेकिन जहां जीत की संभावना है, वहां दम लगाना सही है। हमने तो ऐसा ही किया है। एक कांग्रेसी विधायक कहते हैं कि किसी लोकसभा में प्रत्याशी की जीत या हार से किसी मंत्री या विधायक की परफॉर्मेंस का मापदंड नहीं होना चाहिए। एक अन्य मंत्री कहते हैं कि इस समय मंत्रियों को मैदान में विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए वचनों को लेकर भी जनता को जबाव देना पड़ रहा है। दरअसल कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान कई ऐसे वचन दिए थे, जो अब तक पूरे नहीं हो सके। कांग्रेस ने किसानों की कर्जमाफी का सिलसिला जरूर शुरू किया है, लेकिन ज्यादातर किसानों को अब तक इसका लाभ नहीं मिला है। इस कारण मंत्रियों के सामने मैदान में भी दिक्कत ही दिक्कत नजर आ रही है। बहरहाल अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे प्रदेश की जनता को कैसे कांग्रेस की तरफ खींचने में कामयाब हुए हैं।
परिणाम तय करेगा मंत्रियों की कुर्सी
कांग्रेस सरकार के मंत्रियों की कुर्सी बचेगी या छिनेगी, यह लोकसभा चुनाव के नतीजे तय करेंगे। इसका कारण यह है कि मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने दो माह पहले ही सभी मंत्रियों को एक-एक लोकसभा सीट की जिम्मेदारी दे दी थी। अगर, कांग्रेस के दावों के अनुसार परिणाम आता है, तब तो सभी मंत्रियों की कुर्सी सुरक्षित रहेगी। यदि, दावों के उलट परिणाम आया, तो यह तय माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कुछ मंत्रियों को हटाकर उनकी कुर्सी पार्टी के दूसरे विधायकों को दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी मंत्रियों को जिलावार जिम्मेदारी दे दिया थी। मंत्रियों ने इसी आधार पर लोकसभा चुनाव में प्रचार भी किया। मुख्यमंत्री कमलनाथ तो पूरे 29 लोकसभा क्षेत्रों में घूमते रहे। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 114 में कांग्रेस का कब्जा है, इसलिए पार्टी हाईकमान ने 20 से अधिक लोकसभा सीटों को जिताने की जिम्मेदारी दी है। कमलनाथ मुख्यमंत्री होने के साथ प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, इसलिए हाईकमान निश्चित तौर पर उनका परफॉर्मेंस देखेगा। वहीं, मुख्यमंत्री मंत्रियों का परफॉर्मेंस चेक करेंगे। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लोकसभा चुनाव के लिए मिशन-2019 फॉर्मूला तय किया है। इसके अनुसार चुनाव में परफॉर्मेंस के आधार पर ही मंत्री, विधायक और संगठन पदाधिकारियों को तरक्की मिलेगी। लोकसभा चुनाव में हार या जीत नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर भी असर डालेगी।
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को स्पष्ट संकेत दिए हैं कि चुनाव के नतीजों के अनुसार उनके विभागों में फेरबदल किया जा सकता है। लोकसभा सीट जिताने वाले मंत्री को बड़े विभाग मिलेंगे तो पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार मंत्री के पर कतरे जाएंगे। विधायकों के लिए मंत्रिमंडल में शामिल होने का यह बड़ा पैमाना भी माना जा सकता है। मुख्यमंत्री की मंशा लोकसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की है। ऐसे में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विधायकों को मौका दिया जा सकता है। कमलनाथ ने जो योजना बनाई है उसके मुताबिक प्रभारी मंत्री के जिम्मे दो जवाबदारी है, एक तो वो जहां से विधायक हैं उस विधानसभा के साथ उसका जिला और फिर जहां प्रभारी मंत्री है उस जिले में भी प्रभारी मंत्री को कांग्रेस को जिताना है। प्रभारी मंत्री वहां के शहर जिला अध्यक्ष के साथ वहां के विधायक हारे हुए उम्मीदवार और संगठन पदाधिकारियों को साथ लेकर योजना बनाएंगे। कांग्रेस कार्यालय में बैठक करेंगे, कहा क्या दिक्कत आ रही है वह सभी बात देखेंगे।
कमलनाथ के राडार पर सभी
कांग्रेस के नाथ के साथ प्रदेश के मुखिया बने कमलनाथ के पास सत्ता और संगठन दोनों की चाबी है और इस चाबी को भी उन्होंने मास्टर-की के रूप में बना रखा है और यह महत्वपूर्ण चाबी सीधे कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी के दरबार तक के ताले खोल देती है। प्रदेश भर के मंत्री, विधायक और कांग्रेस नेताओं को समझ में आ गया कि पूरी प्रदेश कांग्रेस के नाथ कमलनाथ ही है। अब प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर कमलनाथ ने रणनीति बनाकर सारे मंत्री, विधायक और शहर जिला अध्यक्ष के साथ सारे नेताओं को सीधे-सीधे समझा दिया है कि कहीं भी गुटबाजी नहीं होना चाहिए और जहां लम्बे समय से कांग्रेस हार रही है वहां कैसे ताकत लगाई जाए, वहां चुनाव कैसे जीता जाए, संगठन की कोई कमजोरी नजर नहीं आना चाहिए, सारे दिशा-निर्देश के बाद कमलनाथ का संगठनात्मक चाबुक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में तैयार है।
लोकसभा चुनाव में कमलनाथ मुख्यमंत्री की भूमिका में कम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका में सख्त लहजे में नजर आ रहे हैं। वे अपना संगठनात्मक चाबुक साथ लेकर प्रदेश के सारे कांग्रेस नेताओं को अपने राजनीतिक राडार पर ले रहे हैं, जिससे कहीं कोई चूक कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए न हो। इस बार प्रतिष्ठा कांग्रेस की नाथ के नाम पर लगी है। वहीं बड़ी प्रतिष्ठा भोपाल, इंदौर, जबलपुर और विदिशा में भी कांग्रेस की लगी हुई है। कमलनाथ का ध्यान इन चार सीटों पर सबसे ज्यादा है। पार्टी के एक पदाधिकारी कहते हैं कि कमलनाथ जो ठान लेते हैं वह करके ही छोड़ते हैं। वे राहुल गांधी से भी अपने मनपसंद का काम करवाकर ही मानते हैं। इसीलिए सारे कांग्रेसी यहां तक कि मंत्री, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी, शहर जिला पदाधिकारी भी जान चुके हैं कि अगर लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी हारे तो नाथ के निशाने और राडार पर वे आ जाएंगे। किसी सीट पर गुटबाजी है, कौन नेता सक्रिय नहीं है इसकी जानकारी भी कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से ले रहे हैं। प्रदेश के सारे संभाग स्तर की जानकारियां जुटाई जा रही है और सारी जानकारी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय कमलनाथ को दे रहा है।