स्कूली बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए अंडे और दूध देने का प्रस्ताव
रायपुर
मिड डे मील के जरिए स्कूली बच्चों में पोषण बेहतर करने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से फंड बढ़ाने के लिए आग्रह किया है। राज्य शिक्षा अफसरों के मुताबिक बच्चों का बेहतर पोषण हो और वे कुपोषित न हों, इसलिए सभी बच्चों को पालकों की सहमति के आधार पर अंडा या फिर विकल्प में सोया दूध देने पर विचार चल रहा है। इससे बच्चों का स्तर बेहतर होगा।
अधिकारियों के मुताबिक कुछ जिलों में जिला प्रशासन की मदद से बच्चों को बेहतर पोषण दिया जा रहा है। इनमें बीजापुर कलेक्टर ने अंडा देने के लिए पहल की है। हफ्ते में दो दिन बच्चों को अंडे की सब्जी दी जा रही है। सरगुजा में एक गैर सरकारी संगठन की मदद से बच्चों को हफ्ते में एक दिन केला दिया जा रहा है।
कुछ जगहों पर दूध देने के लिए भी प्रस्ताव है। लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक एस. प्रकाश के मुताबिक फिलहाल सप्ताह में एक दिन बस्तर और कबीरधाम सोया दूध दिया जा रहा है। बाकी जगहों पर विस्तार करने के लिए प्लान बना रहे हैं।
राज्य सरकार ने पहली बार मिड डे मील की सैंपलिंग कर कोलकाता लैब में जांच कराई तो सारे सैंपल फेल हो गए। प्राइमरी स्कूलों में प्रोटीन न्यूनतम 8.14 ग्राम तक मिला, जबकि मापदंडों के अनुसार 20 ग्राम होना चाहिए। इसी तरह प्राइमरी स्तर पर एनर्जी 450 कैलोरी होनी चाहिए, लेकिन जांच में 320.305 कैलोरी मिली। मिडिल स्तर पर प्रोटीन 20 ग्राम की जगह 11.895 ग्राम तक और एनर्जी 700 कैलोरी की जगह 424.11 कैलोरी मिली।
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