गांधी जयंती विशेष : अमेठी की धरती पर भी पड़े थे बापू के पांव

गांधी जयंती विशेष : अमेठी की धरती पर भी पड़े थे बापू के पांव

 अमेठी 

देश महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है। ऐसे में अमेठी को भी आजादी के इस महानायक की याद आना लाजमी है। बापू की यादें अमेठी की धरती से भी जुड़ी हैं। बापू ने अपनी यात्रा के दौरान 1942 में जिले के लोगों का अभिवादन स्वीकार किया था।

आजादी के दीवानों को खबर मिली कि बापू ट्रेन से जा रहे हैं। लोगों ने गौरीगंज में ट्रेन रोक दी। लोगों ने बापू का जयकारा लगाते हुए उनका जोरदार अभिवादन किया। लोगों ने बापू को चंदे द्वारा इकट्ठा किए गए सौ रुपये की थैली सौंपी। बापू थोड़ी देर बाद बाहर निकले और बोले कि सौ में एक रुपया कम है। इस पर खजांची रामचरित सेठ ने उन्हें निकाला गया एक रुपया वापस किया। इस पर बापू समेत सभी लोग हंसने लगे। 

साहित्यकार जगदीश पीयूष बताते हैं कि जिले में बापू का यह प्रथम और अंतिम आगमन था। लेकिन यह यादगार बन गया। उन्होंने बताया कि जिले के लोग भी आजादी के दीवानों की कतार में शामिल थे। यहां से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू गिरिराज सिंह, बाबू बैजनाथ सिंह ने अंग्रेजों के जुल्मों सितम को सहा। यह सभी लोग आजीवन गांधीवादी थे।

हर आंदोलन से रहा जुड़ाव
गांधी के हर आंदोलन से अमेठी के लोगों का जुड़ाव रहा। उनके आह्वान पर जिले के क्रांतिकारियों ने जेल यात्राएं की। पड़ोसी जनपदों में उनके आगमन पर यहां का जत्था भी जाता था।

गांधी व्यक्ति नहीं सिद्धांत
जगदीश पीयूष ने कहा कि सादा जीवन उच्च विचार ही गांधीवाद है। गांधी एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार हैं। ऐसा विचार जो पराई पीर को महसूस करने और सत्य अहिंसा को अपनाने की बात करता है।