यमुना एक्सप्रेसवे दुर्घटना: जांच कमेटी ने कहा, दो चालक होते तो टल सकता था हादसा
आगरा
यमुना एक्सप्रेस-वे पर सोमवार को हुए भीषण बस हादसे की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में त्रिस्तरीय सुझाव देते हुए एक्सप्रेस-वे की खामियों को भी इंगित किया गया है। प्रथम दृष्टया दुर्घटना का कारण बस चालक को झपकी आना माना गया है। रोडवेज अधिकारियों को जांच के घेरे में लेने के साथ दुर्घटनाएं रोकने के लिए समिति ने सुझाव भी दिए हैं।
हादसे की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने परिवहन आयुक्त को सौंपी रिपोर्ट में चालक को रास्ते की जानकारी भी न होने का उल्लेख किया है। साथ ही लंबी दूरी में बस पर मात्र एक चालक होने पर सवाल उठाते हुए दो चालकों की तैनाती जरूरी बताई है।
रिपोर्ट में कहा है कि बस जहां से चली थी, उस स्टेशन के अधिकारियों के खिलाफ भी लापरवाही पूर्ण रवैये के मामले में जांच हो, और उनके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए। सोमवार को रेलिंग तोड़कर झरना नाले में गिरी बस के 29 यात्रियों की मौत से कोहराम मच गया था। समिति ने परिवहन आयुक्त को सौंपी अपनी गोपनीय रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है।
दुर्घटनाएं रोकने के लिए समिति के सुझाव
1. यमुना और लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जाने चाहिए। इन स्पॉट पर चालकों को ध्यान रखने और कम रफ्तार में गाड़ी चलाने के संकेताक मार्ग में लगाए जाएं।
2. परिवहन निगम की बसों के चालकों के यात्रा प्रारंभ करने से पहले और बाद में उनका चेकअप किया जाना चाहिए।
3. रोडवजे बसों में स्पीड गर्वनर अनिवार्य रूप से लगें। यात्रा से पहले बस का पूरा परीक्षण हो। बसों की फिटनेस समय-समय पर चेक हो। बिना मानक वाहन यात्रा पर न भेजे जाएं।
4. हादसे का शिकार जनरथ बस का चालक रास्से से अनजान था। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। लंबी दूरी की बसों में दो चालक हों।
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