कहां गया 90 दिन में आतंक का खात्मा करने का इमरान का वादा? भारत कैसे करे ऐतबार

कहां गया 90 दिन में आतंक का खात्मा करने का इमरान का वादा? भारत कैसे करे ऐतबार

 
नई दिल्ली 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सत्ता की कमान संभालने के 90 दिन के अंदर अपने देश से आतंकवाद का खात्मा करने का वादा किया था, लेकिन 197 दिन गुजरने के बावजूद अभी तक आतंकी संगठनों और उनके आकाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.

इतना ही नहीं, इमरान खान के सत्ता मेंं आने के बाद कश्मीर में सीआरपीएफ के काफिले पर अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला भी हुआ. साथ ही आतंक का अड्डा बना पाकिस्तान अपने पीएम इमरान खान के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार देने की मांग कर रहा है. इसके लिए पाकिस्तान की संसद में बाकायदा प्रस्ताव तक लाया गया, जिसमें कहा गया कि भारतीय पायलट अभिनंदन वर्द्धमान की रिहाई के बदले इमरान को शांति नोबेल पुरस्कार दिया जाए. ऐसे में सवाल यह उठता है कि दुनिया के सामने शांति का राग अलापने वाले इमरान खान पर भारत कैसे ऐतबार करे.

आपको बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुई हवाई भिड़ंत के बाद से सीमा पर जबरदस्त तनाव है. भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान पर दबाव डाल रहा है, लेकिन अभी तक पाकिस्तान की ओर से आतंकवादियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तान खूंखार आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है.

कहां गया आतंकवाद खत्म करने का इमरान खान का वादा
इतिहास इस बात का गवाह है कि पाकिस्तान का निजाम चाहे जो रहा हो, लेकिन वहां आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई कभी नहीं हुई. क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान ने साल 2012 में आजतक के कार्यक्रम में कहा था कि अगर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो 90 दिन के भीतर आतंकवाद का खात्मा कर देंगे, लेकिन उनको सत्ता की कमान संभाले 197 दिन बीत चुके हैं और अभी तक पाकिस्तान में दहशतगर्द आतंकी खुलेआम घूम रहे हैं.

पाकिस्तान ने अभी तक मसूद अजहर, हाफिज सईद, दाऊद इब्राहिम और सैयद सलाउद्दीन जैसे तमाम खूंखार आतंकियों को पाल रखा है. ये आतंकवादी और इनके आतंकी संगठन पाकिस्तान सरकार और सेना की छत्रछाया में अपने खुद को लगातार मजबूत कर रहे हैं.

विदेशों से मदद लेकर आतंकियों को सुरक्षित पनाह देता है पाकिस्तान
पाकिस्तान पहले विदेशों से आतंकियों को खत्म करने के लिए आर्थिक मदद मांगता है और बाद में कार्रवाई करने की बजाय आतंकियों को सुरक्षित पनाह देता है. पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को अपनी विदेश नीति के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. कश्मीर घाटी में पाकिस्तान के ये आतंकी लगातार अपनी वारदातों को अंजाम दे रहा है.

पाकिस्तान में पल रहे खूंखार आतंकी संगठन
पाकिस्तान को वहां की सेना चलाती है. पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने जिन आतंकी संगठनों को पाल रखा है, उनकी लंबी फेहरिस्त है. इन आतंकी संगठनों में लश्कर-ए-तैय्यबा, जैश-ए-मोहम्मद, जमात-उद-दावा, अलकायदा, हिजबुल मुजाहिदीन, इंडियन मुजाहिदीन, तहरीक-ए-तालिबान, तहरीक-ए-फुरकान, अल बद्र, जमात-उल-मुजाहिदीन, हरकत-उल-मुजाहिदीन, हरकत-उल-अंसार, हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी, लश्कर-ए-झांगवी, दुख्तरान-ए-मिल्लत, सिपाह-ए-सहाबा, जैश-उल-अदल और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन शामिल हैं. पाकिस्तानी सेना और आईएसआई इन आतंकियों को ट्रेनिंग देते हैं. साथ ही भारत में हमला करने के लिए घुसपैठ कराते हैं.

पुलवामा आतंकी हमले के दोषियों पर भी इमरान सरकार ने नहीं की कार्रवाई
पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान भले कह रहे हों कि उनकी जमीन को दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद के लिए इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. पाकिस्तानी आतंकी भारत समेत दूसरे देशों में अपने नापाक मंसूबों को खुलेआम अंजाम दे रहे हैं. कश्मीर में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई आतंकियों की घुसपैठ करा रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के पीछे भी पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ था. जैश-ए-मोहम्मद ने खुद इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे.

इसके बाद भारत ने पुलवामा हमले का डोजियर भी पाकिस्तान को सौंपा था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. अब पाकिस्तान इससे पल्ला झाड़ने की भी कोशिश में जुटा हुआ है. उसका कहना है कि पुलवामा हमले में पाकिस्तानी आतंकियों के शामिल होने के कोई सबूत नहीं हैं.