करैरा तहसील से गायब हुई शासकीय भूमि की सीमांकन रिपोर्ट, शिकायतकर्ता ने लगाया मिलीभगत का आरोप
vikas dandotiya
करैरा- करैरा तहसील में राजस्व सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बार मामला करैरा के पास स्थित ग्राम खैराघाट की शासकीय भूमि के सीमांकन की रिपोर्ट की प्रमाणित नकल से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आवेदन देने के काफी समय बाद भी उन्हें सीमांकन रिपोर्ट की सत्यप्रतिलिपि उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि इसके लिए उन्होंने तय प्रक्रिया के अनुसार आवेदन किया था। जानकारी के अनुसार करैरा निवासी दीपक जैन ने ग्राम खैराघाट में स्थित गार्डन सिटी कॉलोनाइजर द्वारा शासकीय भूमि पर कब्जा किए जाने की शिकायत तहसीलदार करैरा से की थी। शिकायत मिलने के बाद एसडीएम करैरा ने 13 मई 2026 को पत्र जारी कर विवादित भूमि का सीमांकन कराने के निर्देश दिए। इसके बाद तत्कालीन नायब तहसीलदार मांगीलाल अहिरवार के नेतृत्व में राजस्व टीम ने 28 मई 2026 को मौके पर पहुंचकर सीमांकन किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि सीमांकन के दौरान राजस्व दल ने शासकीय भूमि पर मे. बगीचा सरकार डेवलपर्स का कब्जा पाया था। इसके बाद उन्होंने इस सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए 4 जून 2026 को लोक सेवा केंद्र करैरा के माध्यम से आवेदन किया। आरोप है कि आवेदन देने के बाद भी तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट की नकल उपलब्ध नहीं कराई गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना प्रमाणित रिपोर्ट के वह आगे की कानूनी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। उनका आरोप है कि करैरा तहसीलदार ललित शर्मा और संबंधित कॉलोनाइजर के बीच मिलीभगत होने के कारण जानबूझकर रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। फिलहाल इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति समय पर क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई।
इस मामले में तहसीलदार ललित शर्मा का पक्ष जानने के लिए कई बार मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी ओर से फोन रिसीव नहीं किया गया।
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