मेहनत और बिहान के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहीं जयकुंवर

मेहनत और बिहान के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहीं जयकुंवर

कोरिया, कभी सीमित खेती और मजदूरी से परिवार की जरूरतें पूरी करने वाली ग्राम विक्रमपुर की जयकुंवर आज तीन व्यवसाय संचालित कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से मिले आर्थिक सहयोग और अपनी मेहनत से उन्होंने परिवार की आजीविका को नया आधार दिया है। इन गतिविधियों से उनकी सालाना आय लगभग दो लाख रुपये तक पहुंच गई है।

विकासखंड सोनहत के ग्राम विक्रमपुर निवासी जयकुंवर पहले अपने पति तीरथ सिंह के साथ थोड़ी-सी जमीन पर वर्षा आधारित खेती करती थीं। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास की रोजगारमूलक योजनाओं में मजदूरी परिवार की आय का सहारा थी। सीमित आमदनी के कारण उन्हें अक्सर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

’समूह से जुड़कर मिली आगे बढ़ने की राह’

गांव में बिहान के अंतर्गत संचालित स्व-सहायता समूह की सदस्य बनने के बाद जयकुंवर को आजीविका बढ़ाने के अवसरों की जानकारी मिली। समूह के माध्यम से उन्हें पहले 15 हजार रुपये और बाद में 60 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने छोटे व्यवसाय शुरू कर परिवार की आय बढ़ाने का निर्णय लिया।

जयकुंवर ने जनरल स्टोर और फैंसी सामान की दुकान खोली। साथ ही गांव में चिकन की मांग को देखते हुए चिकन सेंटर भी शुरू किया। स्थानीय जरूरतों के अनुरूप व्यवसाय चुनने और उनके संचालन में मेहनत करने से उन्हें नियमित आमदनी मिलने लगी।

तीन व्यवसायों से मजबूत हुई परिवार की आर्थिक स्थिति

आज जयकुंवर के पास खेती और मजदूरी के अलावा आय के तीन साधन हैं। इन व्यवसायों से सालाना लगभग दो लाख रुपये की आय होने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। स्वयं का काम खड़ा करने से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

जयकुंवर की यह पहल बताती है कि समय पर मिला आर्थिक सहयोग और स्थानीय जरूरतों की समझ ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार की राह खोल सकती है। बिहान से मिले अवसर को उन्होंने अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बनाया है।