कृषि आयुक्त ने फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल से सम्बंधित सभी जिलों की तैयारियों की समीक्षा कर दिए निर्देश

कृषि आयुक्त ने फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल से सम्बंधित सभी जिलों की तैयारियों की समीक्षा कर दिए निर्देश

जयपुर। किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप समय पर एवं सुगमता से उर्वरक उपलब्ध कराने तथा कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल व्यवस्था का प्रदेश में चरणबद्ध विस्तार किया जा रहा है। डिजिटल तकनीक आधारित इस व्यवस्था से उर्वरक की मांग, उपलब्धता और वितरण की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जा रहा है।

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल की प्रगति तथा आगामी चरण में अन्य जिलों में इसके क्रियान्वयन की तैयारियों की समीक्षा के लिए सोमवार को पंत कृषि भवन में कृषि आयुक्त  नरेश कुमार गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के अधिकारियों की बैठक लेकर जिलावार तैयारी, उर्वरक की मांग-आपूर्ति, उपलब्ध स्टॉक तथा डिजिटल व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की ।

सिरोही और राजसमंद में पायलट प्रोजेक्ट सफल

गोयल ने बताया कि सिरोही एवं राजसमंद जिलों में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। इन दोनों जिलों में अब तक लगभग 78 हजार से अधिक किसानों को 12 हजार मैट्रिक टन से अधिक उर्वरक वितरित किया जा चुका है। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान प्राप्त सकारात्मक परिणामों ने डिजिटल एवं किसान-केंद्रित वितरण व्यवस्था की उपयोगिता को प्रमाणित किया है।

उन्होंने बताया कि इन जिलों में 25 जून से लागू पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से उर्वरक की मांग से लेकर उपलब्धता एवं वितरण तक की प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी संभव हुई है। इससे वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिली है तथा कालाबाजारी, अनावश्यक जमाखोरी, कृत्रिम कमी और अनियमित वितरण जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत हुआ है।

मंगलवार से 5 जिलों में नई व्यवस्था

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए अब 25 अगस्त से बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू जिलों में  फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल लागू किया जा रहा है। इसके साथ ही 12 अन्य जिलों में भी जल्द इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा तथा इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

घर बैठे बुकिंग, 48 घंटे तक वैध रहेगा टोकन

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की बुकिंग करते हैं। बुकिंग के बाद किसान को 48 घंटे की वैधता वाला टोकन जारी किया जाता है। किसान इस टोकन के आधार पर अपने नजदीकी अधिकृत उर्वरक विक्रेता से उर्वरक प्राप्त करता है। 

यदि किसान निर्धारित 48 घंटे की अवधि में उर्वरक प्राप्त नहीं करता है तो उसे पुनः बुकिंग करनी होती है। इससे वास्तविक आवश्यकता वाले किसानों को प्राथमिकता मिलती है और उर्वरक वितरण की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित रहती है।

उर्वरक के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से किसान को उसकी आवश्यकता के अनुरूप बुकिंग की सुविधा मिलने के बाद नजदीकी अधिकृत विक्रेता से उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। इससे किसानों को उर्वरक के लिए एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक जाने तथा लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी से राहत मिल रही है।

तकनीक आधारित इस व्यवस्था से किसानों को यह भी पता रहता है कि उन्हें उर्वरक कहां और किस प्रक्रिया के तहत प्राप्त करना है। इससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।

वास्तविक मांग और उपलब्ध स्टॉक पर रहेगी लगातार नजर

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से उर्वरक की वास्तविक मांग और उपलब्ध स्टॉक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। डिजिटल निगरानी के जरिए मांग, आपूर्ति और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है, अनावश्यक खरीद पर अंकुश लगा और जरूरतमंद किसानों को प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। साथ ही उर्वरक की उपलब्धता और वितरण से संबंधित सूचनाओं के आधार पर प्रशासन को समय पर आवश्यक निर्णय लेने में भी सुविधा मिल रही है।

सिरोही और राजसमन्द में लागू करने पर 175 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है, वहीं पूरे प्रदेश में लागू करने पर 675 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त होगी। 
गोयल ने बताया कि कृषि विभाग एलपीजी गैस की तरह किसानों को उर्वरक की  होम डिलीवरी देने पर गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस संबंध में सहकारिता विभाग से प्रारम्भिक चरण की बैठकें हो चुकी है

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के व्यापक विस्तार से वास्तविक मांग के अनुरूप उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ कालाबाजारी एवं जमाखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।