राजस्थान में बदलेगा पुलिसिंग का अंदाज, थाने में वैसा ही व्यवहार करें, जैसा स्वयं के लिए अपेक्षा करते हैं

राजस्थान में बदलेगा पुलिसिंग का अंदाज, थाने में वैसा ही व्यवहार करें, जैसा स्वयं के लिए अपेक्षा करते हैं

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में ‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग’ प्रशिक्षण कार्यक्रम

डीजीपी ने गुरुवार को किया तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण का शुभारंभ

जयपुर। आमजन में पुलिस की सख्त कार्यशैली के प्रति सोच को बदलने और संवेदनशीलता, संवाद और विश्वास को मजबूत करने के लिए राजस्थान पुलिस ने नई पहल की है। पुलिसकर्मियों को पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाने, व्यवहार कुशल बनाने और पुलिसिंग में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए चरणबद्ध प्रशिक्षित किया जा रहा है।

इस पहल की शुरुआत गुरुवार से आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी परिसर में हुई। इस कार्यक्रम का शुभारंभ महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया। यहां ‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग‘ प्रशिक्षण कार्यक्रम में 35 पुलिसकर्मियों के साथ विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर सार्थक संवाद कर रहे हैं। यह कार्यक्रम 17 अक्टूबर तक चलेगा।

डीजीपी शर्मा ने कहा कि राजस्थान पुलिस के आमजन के प्रति संवेदनशील व्यवहार और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की पूरे देश के पुलिस अधिकारियों के बीच चर्चा है। इस सकारात्मक और पेशेवर छवि को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आमजन अपनी परेशानियों को लेकर थाने पहुंचते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मी उनकी बात संवेदनशीलता से सुनें और विधिक प्रक्रिया के तहत राहत दिलाने का प्रयास करें। संवेदनशीलता का अर्थ नरमी बरतना नहीं, बल्कि विधिक प्रक्रिया के तहत पीड़ित को राहत दिलाने का प्रयास करना है।

थाने में ऐसा व्यवहार करें, जैसा स्वयं के लिए चाहते हैं

महानिदेशक पुलिस ने पुलिसकर्मियों से कहा कि वे आमजन की जगह खुद को रखकर सोचें कि जब वे शिकायत लेकर थाने पहुंचें, तो पुलिस से कैसा व्यवहार अपेक्षित करेंगे। ठीक उसी अनुरूप आमजन के साथ भी पेश आएं। अपराधियों के प्रति सख्ती और आमजन के प्रति संवेदनशीलता पुलिस की कार्यशैली का मूल आधार होना चाहिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से थानों की कार्यप्रणाली को नए दृष्टिकोण से देखने, सकारात्मक माहौल बनाने और पुलिस के प्रति आमजन की धारणा को बदलने का आग्रह किया।

डीजीपी ने कहा कि पुलिसकर्मियों को लम्बी ड्यूटी, त्वरित निर्णय लेने और लगातार बदलती चुनौतियों के बीच काम करना पड़ता है। ऐसे में स्पष्ट संवाद, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार और कानून के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है। पारदर्शिता के इस दौर में पुलिस का आचरण हर व्यक्ति की नजर में है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने अनुभव और सफल उदाहरण साझा करने का आह्वान किया।

पूर्व डीजीपी डॉ. एम.के. देवराजन ने कहा कि यह प्रशिक्षण ही नहीं, आत्मचिंतन का मंच है। प्रतिभागी खुलकर विचारों को रखें। सामूहिक चिंतन से ही आगे बढ़ने का रास्ता निकलेगा। उन्होंने पुलिस रिफॉर्म के लिए पूर्व में हुए प्रयासों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में उदय पारीक एचआरडी रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन अपूर्व कुमार ने स्वागत संबोधन दिया। विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. पी.आर. सोढाणी ने आभार व्यक्त किया।

व्यवहार से कार्ययोजना तक

प्रशिक्षण में केस स्टडी, भूमिका-अभिनय, समूह चर्चा और आत्म-चिंतन के जरिए पुलिसिंग को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दूसरे दिन शुक्रवार को ‘दबाव की परिस्थितियों में पुलिसिंग’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें कार्य के दौरान तनाव को समझने, भावनात्मक परिस्थितियों में संयम बनाए रखने, प्राथमिकताएं तय करने और नागरिकों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार विकसित करने पर जोर रहेगा। साथ ही, कठिन संवाद, नाराज शिकायतकर्ता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए भूमिका-अभिनय तथा समूह अभ्यास कराए जाएंगे।

तीसरे दिन शनिवार को ‘सीख से सकारात्मक पुलिसिंग की ओर’ विषय के अंतर्गत प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त सीख को व्यवहार में लागू करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें सकारात्मक व्यवहार, प्रभावी संवाद, सक्रिय रूप से सुनने, आपसी संबंध मजबूत करने और नागरिकों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध विकसित करने के व्यावहारिक उपायों पर काम किया जाएगा। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों की व्यक्तिगत एवं इकाई स्तर की कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी। साथ ही, उन्हें अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध किया जाएगा।