हिंसा भड़काने के आरोपी पूर्व आईपीएस दारापुरी के परिजन से मिलीं प्रियंका गांधी
लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शनिवार को नागरिकता संशोधन कानून के बाद उपजी हिंसा को भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किए गए पूर्व आईपीएस एस.आर. दारापुरी के परिजन से मुलाकात की। इस दौरान कुछ देर के लिए प्रियंका को पुलिस ने रोक लिया था।
दरअसल, सीएए के विरोध में हुई हिंसा भड़काने तथा अन्य आरोप में पुलिस ने पूर्व आईपीएस एस.आर. दारापुरी, सोशल ऐक्टिविस्ट तथा कांग्रेस प्रवक्ता सदफ जफर को गिरफ्तार किया हुआ है। सदफ जफर की फैमिली से मिलने जा रहीं प्रियंका गांधी को रास्ते में पुलिस ने रोक लिया। इस पर प्रियंका ने कहा, 'हमें रोड पर रोकने का कोई मतलब ही नहीं है। यह मामला एसपीजी का नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस का है।'
उपद्रव मामले में गिरफ्तार सदफ जफर की जमानत अर्जी को कोर्ट खारिज कर चुकी है। सदफ जफर ने अर्जी में कहा था कि वह निर्दोष हैं और उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि जिन अपराधों में उनका चालान किया गया है, वह गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे में उन्हें जमानत का अधिकार नहीं है। सदफ ने गिरफ्तारी के बाद पुरुष पुलिसकर्मियों के द्वारा मारपीट का भी आरोप लगाया है।
इससे पहले मेरठ में यूपी पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को जिले की सीमा से लौटा दिया था। CAA के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मेरठ में मारे गए लोगों के परिजन से मुलाकात के लिए जा रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को मंगलवार को पुलिस ने रोक लिया। दोनों नेता एक ही कार में सवार थे। मेरठ में एंट्री से पहले ही जिले के बॉर्डर पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर दोनों नेताओं को रोका, जिसके बाद दोनों ने अपनी गाड़ी दिल्ली की तरफ मोड़ दी। इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें किसी ऑर्डर की कॉपी नहीं दिखाई गई, बस लौटने के लिए कह दिया गया।
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