एसएटीआई : फर्जीवाड़ा उजागर किया तो डायरेक्टर ने पांच प्रोफेसरों ने दिखाया बाहर का रास्ता

एसएटीआई : फर्जीवाड़ा उजागर किया तो डायरेक्टर ने पांच प्रोफेसरों ने दिखाया बाहर का रास्ता

भोपाल
 राजीव गांधी प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) से संबद्ध विदिशा के संस्था एसएटीआई में प्रोफेसरों द्वारा डायरेक्टर जनार्दन सिंह चौहान के खिलाफ मोर्चा खोलना महंगा पड़ गया है। डायरेक्टर ने इसकी खुन्नस निकालते हुए पांच प्रोफेसरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। डायरेक्टर इसके पीछे बजट की कमी होने सहारा लिया गया है। यह वही प्रोफेसर हैं, जो विगत दिनों राजधानी पहुंचकर मीडिया के सामने चौहान के डिग्री फर्जीवाड़े को उजागर किया था।

एसएटीआई  में पीएफ में कटौत्रा को लेकर शैक्षणिक और अशैक्षणिक स्टॉफ की प्रबंधन की लड़ाई को लंबा समय बीत गया, लेकिन प्रबंधन की नजर में अब भी वो लोग खटकर रहे हैं, जिन्होंने लड़ाई की अगुवाई की थी। ऐसे प्राध्यापकों को निशाने पर लेकर उन्हें संस्था से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। पहले दो और अब पांच प्राध्यापकों की सेवा समाप्त कर संस्था से बाहर कर दिया गया है। संस्था डायरेक्टर जेएस चौहान द्वारा 1 दिसंबर को जारी पत्र 2 दिसंबर को कुछ प्राध्यापकों को मिला। पत्र में स्पष्ट लिखा है कि मप्र शासन के निर्देश और संस्था की भारी घाटे की स्थिति को देखते हुए और बोर्ड आॅफ गवर्नर्स के अनुमोदन के बाद आपको सेवामुक्त किया जा रहा है। प्राध्यापकों को तीन माह का वेतन देकर उनकी सेवाएं खत्म की गई हैं।

इन प्राध्यापकों को किया बाहर

-डॉ. आलोक जैन
-डॉ. वायके जैन
-डॉ. विभा जैन
-डॉ. धर्मेश जैन
-डॉ. राजेंद्र दुबे
-डॉ. लोकेश बाजपेई
-प्रो. संदीप सराफ

51 की उम्र में नौकरी खत्म
यहां बता दें कि डॉ वायके जैन और डॉ धर्मेश जैन अभी 51 वर्ष की उम्र के हैं, लेकिन उन्हें इस उम्र में ही घर बैठा दिया गया है। जबकी शासन की गाइडलाइन के अनुसार ये 62 वर्ष तक की उम्र में सेवा में रह सकते थे।

पूर्व सचिव के खेमे का बिल्ला
यहां बता दें कि हटाए गए प्राध्यापक वर्ग में से अधिकांश पर ्रसोसायटी के पूर्व सचिव प्रतापभानु शर्मा के खेमे का होने का बिल्ला लगा हुआ है। शर्मा ने ही आंदोलन के दौरान डॉ आलोक जैन और फिर डॉ राजेंद्र दुबे को संचालक की कुर्सी पर बैठाने के आदेश जारी किए थे। यही बात मौजूदा संचालक और प्रबंधन को नागवार गुजरी थी।

अनुभवी प्राध्यापकों से शून्य होता जा रहा परिसर
जहां एक ओर तकनीकी शिक्षा में प्रतिस्पर्धा का दौर चल रहा है, वहीं एसएटीआइ में अब घाटे की आड़ में पुराने, अनुभवी और उच्च शिक्षित प्राध्यापकों को घर बैठाने की मुहिम चल रही है। ऐसे में परिसर अनुभवी प्राध्यापकों से शून्य होता जा रहा है, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों और संस्था की प्रतिष्ठा को भुगतना पड़ेगा।

सब दहशत में कब उनका नंबर आ जाए
पिछली बार संदीप सराफ और लोकेश बाजपेई के बाद अब ये पांच प्राध्यापकों को निकाले जाने से एसएटीआइ में दहशत का माहौल है। हर प्राध्यापक और कर्मचारी डरा हुआ है कि कब उसका नंबर आ जाए और उसकी सेवाएं समाप्त हो जाएं। ऐसे में सब दहशत में काम कर रहे हैं।