लम्पी रोग से गौवंश को बचाने की विभाग की पूरी तैयारी, स्थिति नियंत्रण में: पशुपालन मंत्री
जयपुर। पशुपालन, गोपालन और देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा है कि प्रदेश सरकार पशुओं के कल्याण के प्रति समर्पित होकर काम कर रही है। कुमावत ने कहा कि लंपी रोग के बारे में किसी भी तरह से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। सरकार लंपी रोग के प्रति पूरी तरह सतर्क है और इसकी रोकथाम के लिए सभी एहतियाती कदम उठा रही है।
पशुपालन मंत्री ने कहा कि पशुपालकों को इस बीमारी से भयभीत होने की कोई जरूरत नहीं है, विभाग अपना काम पूरी मुस्तैदी से कर रहा है और जहां भी कुछ ऐसे केस मिल रहे हैं वहां तुरंत सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। विभाग में प्रचुर मात्रा में औषधियां भी उपलब्ध हैं। रोगी गौवंश को अविलम्ब आइसोलेशन कर समुचित उपचार की व्यवस्था विभाग द्वारा सुनिश्चित कर ली गई है। मंत्री कुमावत ने बताया कि इस वर्ष पूर्वी राजस्थान में लंपी के केस ज्यादा हैं लेकिन वहां भी स्थिति नियंत्रण में है। अब तक भरतपुर और डीग जिले में कुल 16 गौवंशों की मृत्यु लंपी के कारण हुई है। अधिकतर गौवंश रोग से मुक्त कर लिए गए हैं और शेष रह गए लगभग 4500 गौवंशों का उपचार जारी है। जल्द ही उन्हें भी रोगमुक्त कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि रोग को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं जिनमें से टीकाकरण और जागरूकता अभियान मुख्य हैं। टीकाकरण इस रोग से बचाव का एक प्रमुख हथियार है इसलिए राज्य सरकार ने पशुओं के टीकाकरण पर जोर दिया जिससे रोग के प्रसार को समय रहते रोका जा सके। वर्ष 2026-27 में लगभग 90 प्रतिशत गौवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके अलावा सरकार ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाकर पशुपालकों को लंपी रोग के बारे में जानकारी भी उपलब्ध करा रही है।
पशुपालन मंत्री ने कहा कि लंपी रोग पशुओं का एक संक्रामक रोग है। इससे मुख्य रूप से गौवंश प्रभावित होते हैं और पशुपालकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। प्रदेश पूर्व में इस रोग का दंश झेल चुका है। इसलिए सरकार अब इस रोग से बचाव के लिए सक्रिय होकर कार्य कर रही है। उन्होंनेे कहा कि पिछले वर्ष भी दो माह के टीकाकरण अभियान के तहत राज्य की लगभग 95 प्रतिशत गौवंश का टीकाकरण किया गया था जिससे रोग को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया था और गौवंश की हानि लगभग नहीं के बराबर हुई थी। कुमावत नेे विभाग की सराहना करते हुए कहा कि इस रोग के सर्वेक्षण, निदान और नियंत्रण के लिए समय रहते आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पशुपालन मंत्री ने पशुपालकों से भी अपील की है कि वे अपने गौवंश की विशेष निगरानी रखें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत पशु चिकित्सा संस्थानों और पशु चिकित्सकों से संपर्क करें। अपने पीड़ित गौवंश को अन्य पशुओं से अलग कर दें और प्रभावित क्षेत्रों से नए पशुओं को लाने या ले जाने से बचें।
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