ई-अटेंडेंस बनी शिक्षकों की मुसीबत

ई-अटेंडेंस बनी शिक्षकों की मुसीबत

nadeem khan
पन्ना। मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था अब दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। इस सत्र से अतिथि शिक्षकों के साथ-साथ नियमित शासकीय शिक्षकों के लिए भी ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर वेतन कटौती की कार्रवाई भी की जा सकती है। ऐसे में सड़क, मोबाइल नेटवर्क और मूलभूत सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक रोज नई मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। बरसात के मौसम में पन्ना जिले के दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में नदी-नाले उफान पर हैं। कई गांवों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक उपलब्ध नहीं है, वहीं अधिकांश क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क भी नहीं मिलता। ऐसे में शिक्षक विद्यालय पहुंचने और समय पर ई-अटेंडेंस लगाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। कहीं नेटवर्क की तलाश में पेड़ों और पहाड़ियों पर चढ़ना पड़ रहा है तो कहीं उफनते नालों को पार करना पड़ रहा है। ताजा मामला पन्ना जिले के पवई विकासखंड का है। वायरल वीडियो के अनुसार शासकीय पीएम श्री कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संकुल पवई से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कुटरहिया में पदस्थ शिक्षक सुनंदी चैधरी मंगलवार को विद्यालय पहुंचने के दौरान उफनते नाले को पार कर रहे थे। तेज बहाव में उनका संतुलन बिगड़ गया और वे बहने लगे। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के कारण शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंच सके और उनकी ई-अटेंडेंस भी दर्ज नहीं हो सकी। इसी तरह शासकीय माध्यमिक शाला कैमुरिया में भी शिक्षकों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय तक पहुंचने के लिए न सड़क है और न ही पर्याप्त मोबाइल नेटवर्क। शिक्षकों को पहले बांध पार करना पड़ता है, फिर बिना सड़क वाली पहाड़ी चढ़कर विद्यालय पहुंचना होता है। नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उन्हें कई बार स्थान बदलकर उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद सफलता नहीं मिलती। शिक्षकों का कहना है कि वे शिक्षण कार्य के साथ जनगणना, चुनाव और अन्य शासकीय दायित्व पूरी निष्ठा से निभाते हैं, लेकिन ई-अटेंडेंस जैसी व्यवस्था दूरस्थ क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना लागू कर दी गई है। उनका सवाल है कि यदि सड़क और नेटवर्क की सुविधा ही नहीं है तो समय पर उपस्थिति कैसे दर्ज की जाए। विकासखंड शिक्षा अधिकारी पवई हाकम सिंह यादव ने बताया कि ई-अटेंडेंस से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए जिले में तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम नेटवर्क, आवागमन और अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों का परीक्षण करेगी। उन्होंने सभी शिक्षकों से बारिश के मौसम में अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि वास्तविक समस्याओं का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।