रक्षा बंधन, श्रावण पूर्णिमा हमारी परंपरा के पर्व, संस्कृत हमारी ज्ञान-विरासत की पहचान: देवनानी

रक्षा बंधन, श्रावण पूर्णिमा हमारी परंपरा के पर्व, संस्कृत हमारी ज्ञान-विरासत की पहचान: देवनानी

जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने रक्षा बंधन, श्रावण मास की पूर्णिमा एवं विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। देवनानी ने कहा कि रक्षा बंधन भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र स्नेह, विश्वास, दायित्व और संकल्प का पर्व है। रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं, यह उस भाव का प्रतीक है जिसमें एक-दूसरे के सुख-दुःख में साथ खड़े रहने और अपने रिश्तों के प्रति कर्तव्य निभाने का संकल्प निहित है। भारतीय संस्कृति में परिवार और रिश्तों को समाज की आधारभूत इकाई मानते हुए उनमें प्रेम, सम्मान और उत्तरदायित्व की भावना को सदैव महत्व दिया जाता है।

देवनानी ने कहा कि श्रावण पूर्णिमा भारतीय जीवन परंपरा में आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और लोकमंगल की भावना से जुड़ा पवित्र अवसर है। श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का विशेष काल माना जाता है। भगवान शिव त्याग, तप, संयम और लोककल्याण के प्रतीक हैं। उनकी आराधना हमें यह प्रेरणा देती है कि जीवन में कठिन परिस्थितियों के बीच भी धैर्य, संयम और परोपकार के मार्ग पर आगे बढ़ते रहें।

विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर देवनानी ने कहा कि संस्कृत भारत की हजारों वर्षों की ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण आधारशिला है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, पुराण और भारतीय दर्शन की विशाल परंपरा संस्कृत भाषा में सुरक्षित है। संस्कृत के शब्दों में भारत का दर्शन, चिंतन, जीवन-मूल्य और विश्व कल्याण की भावना समाहित है। उन्होंने कहा कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ जैसे संस्कृत सूत्र भारत की उस महान दृष्टि को प्रकट करते हैं, जिसमें सम्पूर्ण मानवता के कल्याण और विश्व को परिवार मानने की भावना है। आज के समय में भी ये विचार उतने ही प्रासंगिक हैं।

विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि यह तीनों अवसर अपने-अपने स्तर पर भारतीय जीवन-दर्शन की एक ही व्यापक भावना को अभिव्यक्त करते हैं। रक्षा बंधन रिश्तों में विश्वास और दायित्व का संदेश देता है, श्रावण पूर्णिमा आत्मशुद्धि और लोकमंगल की प्रेरणा देती है तथा संस्कृत दिवस हमें अपनी ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है। इन मूल्यों को केवल पर्वों तक सीमित न रखकर अपने आचरण और जीवन में उतारना ही इन अवसरों की वास्तविक सार्थकता है। देवनानी ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की।