khemraj mourya
शिवपुरी। प्रदेश कांग्रेस महासचिव हरवीर सिंह रघुवंशी और प्रदेश सचिव विजय शर्मा ने भाजपा शासनकाल में नियुक्त किए गए मध्यप्रदेश बाल आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा के सरकार बदलने के बाद भी पद पर बने रहने पर सवाल खड़े किए हैं। दोनों पदाधिकारियों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा शासनकाल में मंडलों, बोर्डों और आयोग में राजनैतिक आधार पर की गईं नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी हैं तो श्री शर्मा अपने पद पर क्यों बने हुए हैं?

हालांकि महिला बाल विकास अधिकारी पांडे ने श्री शर्मा के पद पर बने रहने को वैधानिक बताया है और कहा है कि बिना कार्यकाल समाप्त हुए उन्हें पद से नहीं हटाया जा सकता।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कल मध्यप्रदेश बाल आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा और सदस्य ब्रजेश सिंह चौहान ने सेंट चाल्र्स स्कूल का निरीक्षण कर वहां कई खामियां पाईं थीं। स्कूल में मिली खामियों को बाल आयोग ने गंभीरता से लेते हुए कार्यवाही करने की बात कही थी। उक्त आशय के समाचार आज जब समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए तब कांग्रेसियों को समझ में आया कि भाजपा शासनकाल में नियुक्त किए गए बाल आयोग अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा अभी भी पद पर हैं। इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश महासचिव हरवीर सिंह रघुवंशी और प्रदेश सचिव विजय शर्मा ने उनके पद पर बने रहने पर सवाल खड़े किए और कहा कि वह किस हैसियत से पद पर हैं। जब उन्हें बताया गया कि नियमानुसार महिला आयोग, बाल आयोग, बाल संरक्षण आयोग आदि भंग नहीं किए जा सकते और इन आयोगों में की गई नियुक्तियां कार्यकाल समाप्त होने तक जारी रहती हैं तथा राज्य शासन को इन नियुक्तियों को राजनैतिक आधार पर मानते हुए हटाने का अधिकार नहीं है तो दोनों पदाधिकारियों ने नैतिकता का हवाला दिया।
हाईकोर्ट जजों से भी मांगो इस्तीफा : श्री शर्मा
प्रदेश सरकार हटने के बाद जिस तरह से मेरे बने रहने पर सवाल कांग्रेसियों द्वारा खड़े किए जा रहे हैं उसी तरह से वह उन हाईकोर्ट जजों को हटाने की भी मांग करें जिनकी नियुक्तियां भाजपा शासनकाल में हुई हैं। वे यदि इस्तीफा दे देंगे तो मैं भी दे दूंगा। कांग्रेसियों को कानून और संविधान की जानकारी होनी चाहिए। उक्त बयान बाल आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया में दिया।
इनका कहना है-
बाल आयोग, महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग, बाल संरक्षण आयोग का दर्जा संवैधानिक है और इनके पदों पर की गईं नियुक्तियां कार्यकाल तक जारी रहती हैं। बशर्ते है कि कोई असामान्य परिस्थिति न हो। बाल आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा वैधानिक आधार पर ही पद पर हैं। वैसे उनका कार्यकाल मार्च 2019 में समाप्त हो रहा है।
ओपी पांडेय, महिला बाल विकास अधिकारी