गोरखपुर, कोरोना संक्रमण से जीत चुके लोगों के हड्डियों में दर्द की शिकायत बढ़ने लगी है। संक्रमित के इलाज में लंबे समय तक स्टेरॉयड के प्रयोग के कारण ये दिक्कतें हो सकती हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और शहर के निजी हड्डी रोग विशेषज्ञों के पास बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। एसिंप्टोमेटिक संक्रमित में भी हड्डियों के दर्द के मामले सामने आ रहे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के डॉ. संजय चौधरी ने बताया कि कोरोना संक्रमितों के इलाज में स्टेरॉयड का प्रयोग होता है। गंभीर रूप से बीमार संक्रमित में लंबे समय तक स्टेरॉयड चलता है। इसका साइड इफेक्ट हड्डियों पर पड़ता है और उनमें दर्द होता हैं। हड्डियों का घनत्व कम होता है और वह कमजोर हो जाती हैं।
जिन लोगों की हड्डियां पहले से कमजोर हैं वे कोरोना वायरस के सॉफ्ट टारगेट हो सकते हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. इमरान अख्तर ने बताया कि 40 से अधिक उम्र वाले कोरोना संक्रमित कुछ लोगों में हड्डियां कमजोर मिली है। वह पहले से हड्डी दर्द से पीड़ित थे। उनके शरीर में प्रोटीन और विटामिन-डी की कमी थी। कुछ संक्रमित में कैल्शियम भी कम था। ठीक होने के बाद वह अब अपना इलाज करा रहे हैं।
हड्डियों का दर्द देता है रोग प्रतिरोधक क्षमता का संकेत
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सिंह श्रीनेत ने बताया कि हड्डियों की समस्या रोग प्रतिरोधक क्षमता का भी संकेत देती है। शरीर में इम्यूनिटी कम होने पर हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है। इसका सीधा संबंध शरीर में प्रोटीन व विटामिन-डी की कमी से है। कैल्शियम की कमी से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इन तीनों के कम होने से हड्डियों का घनत्व कम होता है। यही वजह है कि संक्रमण से बचाव के लिए कैल्शियम और विटामिन के सेवन की सलाह दे रहे हैं।
खराब हो रहे हैं कूल्हे और घुटने
वायरस का संक्रमण खत्म होने के बाद भी उसका दुष्प्रभाव खत्म नहीं होता। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि इस वायरस के संक्रमण के कारण खून में हाईपरकाग्यूलेशन हो जाता है। इसमें खून के कण आपस में चिपक जाते हैं। इससे खून में थक्का जम जाता है। यह थक्का जब कूल्हे और घुटनों के जोड़ के पास पहुंचते हैं तो वहां की हड्डियों और धमनियों से चिपक जाते हैं। यह इसके कारण कूल्हे और घुटने के मूवमेंट में मरीज को परेशानी होती है। दर्द होता है। रक्त का थमना जमने के कारण धमनियां चोक हो जाती है। इसे एवेस्कुलर नेक्रोसिस (ईवीएन) कहते हैं। ऐसे में रक्त प्रवाह न होने कारण अंग सड़ने लगता है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंच रहे मरीज
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजन शाही ने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में बड़ी संख्या में हड्डी दर्द के मरीज आ रहे हैं। इन मरीजों में कोरोना से जीत चुके लोग भी शामिल हैं। इनके हड्डियों के साथ मांसपेशियों में भी दर्द की शिकायत रह रही है। ओपीडी में अब तक 95 से अधिक लोग इलाज करा चुके हैं। जबकि 40 मरीजों का इलाज चल रहा है।
महिलाओं को है ज्यादा खतरा
होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. रूप कुमार बनर्जी ने बताया कि हड्डियों का कमजोर होना ऐसी समस्या है जिसका उम्रदराज लोगों को अधिक सामना करना पड़ता है। 50 साल की उम्र के बाद हर तीन में से एक महिला को यह समस्या होती है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होती है। दुनिया में हर तीन में से एक महिला और हर पांच में से एक पुरुष को ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डी फ्रैक्चर होने का जोखिम बना रहता है।