श्री महाकालेश्वर में महाशिवनवरात्रि के तहत आयोजन जारी, करें आसान उपाय, प्रसन्न होंगे भोलेनाथ
छठे दिन संध्याकाल आरती में भगवान का दिव्य श्री होल्कर मुखौटा श्रृंगार
brijesh parmar
उज्जैन । महा शिव नवरात्रि के तहत श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान का विशेष पूजन अर्चन किया जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि सर्वार्थसिद्धि योग, श्रवण नक्षत्र व चतुगृही संयोग में होगी। इसमें की गई साधना फलदायी बताई जा रही है। शिवनवरात्रि के षष्ठम दिवस ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर जी के रुद्राभिषेक के पश्चात भगवान को केसर चंदन लेपन कर जलाधारी में अबीर गुलाल कुमकुम हल्दी मेहंदी पूजन सामग्री अर्पित की गई।
महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दौरान सर्वार्थसिद्धि योग और श्रवण नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो शिव साधना को विशेष फल देने वाला माना गया है। इसी दिन कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु की चतुगृही युति भी बनेगी। ज्योतिषीय दृष्टि से ये संयोग अत्यंत शुभ और दुर्लभ है, जिसका प्रभाव कई राशियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा।
महाशिवरात्रि पर्व को लेकर विशेष पूजन, अभिषेक और रात्रिकालीन आराधना की तैयारियां की जा रही हैं। जानकारों एवं धर्म विद्वतजनों के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम 5.04 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी की शाम 5.35 बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि में रात्रि पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग और श्रवण नक्षत्र के कारण की गई साधना शीघ्र सिद्धि देने वाली मानी गई है। निशिथ काल की पूजा रात 12.09 से 1.01 बजे तक 51 मिनट रहेगी, जिसे सबसे श्रेष्ठ समय माना गया है।
शिव पूजा का चार प्रहर में विधान
महाशिवरात्रि की रात्रि चार प्रहरों में विभाजित होती है और हर प्रहर में भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। प्रथम प्रहर की पूजा शाम 6.11 से 9.23 बजे तक, द्वितीय प्रहर रात 9.24 से 12.35 बजे तक, तृतीय प्रहर 12.36 से सुबह 3.47 बजे तक तथा चतुर्थ प्रहर सुबह 3.47 से 6.59 बजे तक होगी। इसके बाद दोपहर 3 बजे तक व्रत का पारणा किया जा सकेगा। व्रती भक्तों को शिवरात्रि से एक दिन पहले त्रयोदशी को एक समय भोजन करने और शिवरात्रि के दिन पूर्ण व्रत रखने का विधान बताया गया है।
किस राशि पर क्या प्रभाव
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार कुंभ राशि वालों को कॅरियर और कारोबार में विशेष लाभ मिलेगा। मेष राशि के जातकों को अचानक धन लाभ और शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव में कमी के संकेत हैं। कन्या राशि वालों को पैतृक संपत्ति, भूमि-वाहन से लाभ और कॅरियर में नई उपलब्धियां मिल सकती हैं। मकर राशि के लिए धन संबंधी विवाद सुलझने और रुके कार्य पूरे होने के योग हैं। सिंह और तुला के लिए उन्नति के नए रास्ते खुलेंगे, जबकि कर्क और मीन को मानसिक शांति व आर्थिक अवसर मिलेंगे। वृषभ, मिथुन और धनु के लिए समय मिश्रित फल देने वाला रहेगा।
भगवान शिव बहुत भोले हैं, यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से उन्हें सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं। इसीलिए उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। महाशिवरात्रि (15 फरवरी, रविवार) पर शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अनेक उपाय करते हैं।
कुछ ऐसे ही छोटे और अचूक उपायों के बारे शिवपुराण में भी लिखा है। ये उपाय इतने सरल हैं कि इन्हें बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है। हर समस्या के समाधान के लिए शिवपुराण में एक अलग उपाय बताया गया है। ये उपाय इस प्रकार हैं-
करें आसान उपाय, प्रसन्न होंगे भोलेनाथ
शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है-
1. बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।
2. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।
3. शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।
4. शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
5. शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।
6. यदि शारीरिक रूप से कमजोर कोई व्यक्ति भगवान शिव का अभिषेक गाय के शुद्ध घी से करे तो उसकी कमजोरी दूर हो सकती है।
शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है-
1. लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
4. शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
6. जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
7. कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
10. लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।
11. दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।
आमदनी बढ़ाने के लिए
महाशिवरात्रि पर घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी पूजा करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जाप करें-
ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं
प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं। बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें। माना जाता है ऐसा करने से व्यक्ति की आमदनी में इजाफा होता है।
संतान प्राप्ति के लिए
महाशिवरात्रि की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। अब प्रत्येक शिवलिंग का शिव महिम्न स्त्रोत से जलाभिषेक करें। इस प्रकार 11 बार जलाभिषेक करें। उस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें।
बीमारी के लिए
महाशिवरात्रि पर पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी अन्य धातु के बर्तन का उपयोग करें। अभिषेक करते समय ऊं जूं स: मंत्र का जप करते रहें।
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