राजस्व परसीमन विसंगति से अंबाह-पोरसा के ग्रामीण परेशान

राजस्व परसीमन विसंगति से अंबाह-पोरसा के ग्रामीण परेशान
awdhesh dandotia मुरैना/अंबाह। राजस्व गांवों के परिसीमन की विसंगति के कारण अंबाह पोरसा क्षेत्र के लोगों को राजस्व संबंधी काम कार्य के लिए लंबी दूरी तय करके तहसील व एसडीएम कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है। कलेक्टर स्तर से परिसीमन में सुधार हो तो ग्रामीणों को इस समस्या से निजात मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि मिड़ेला गांव की अंबाह से दूरी 3 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि राजस्व कार्य के लिये ग्रामीणों को 18 किमी की दूरी तय कर पोरसा तहसील कार्यालय पहुंचना पड़ता है। इसी तरह सांगोली गांव पोरसा से 16 किलोमीटर दूर स्थित है लेकिन इस गांव के लोगों को राजस्व संबंधी काम हेतु 45 किमी की दूसरी तय कर अंबाह तहसील आना पड़ता है तथा विन्डवा गांव अम्बाह से महज 23 किमी दूर है लेकिन राजस्व कार्य हेतु ग्रामीणों को 39 किमी का सफर तय पोरसा जाना पड़ता है। इस तरह राजस्व परिसीमन विसंगति के कारण अम्बाह व पोरसा क्षेत्र के अनेक गांवों के ग्रामीणों को राजस्व कार्य के लिये अम्बाह के जनदीक गांवों को पोरसा तथा पोरसा के तहसील के नजदीक गांव के लोगों को अम्बाह तहसील में राजस्व कार्य के लिये लंबी दूरी तय कर जाना पड़ता है। इसी प्रकार रूअर सहित अम्बाह-पोरसा क्षेत्र के अनेक गांवों को नजदीक के तहसील कार्यालयों में जोडऩे के लिये ग्रामीणों ने अधिकारियों से कई बार मांग की है लेकिन ग्रामीणों की इस समस्या का आज तक कोई निदान नही हुआ है जिससे ग्रामीणों को पैसा व समय बर्बाद कर मजबूरन राजस्व कार्य के लिये जाना पड़ता है। विदित है कि अम्बाह व पोरसा क्षेत्र के अधिक दूरी गांवों को राजस्व संबंधी कार्य के लिये नजदीक के तहसील कार्यालय में जोडऩे के लिये वर्ष 2002 में तत्कालीन एसडीएम बीके गुप्त ने एक प्रस्ताव तैयार कर व्यवहारिक परिसीमन को बदलने का प्रयास किया था लेकिन उनके तबादले के बाद मामला ठंडा पड़ गया। यह भी होती है परेशानी व्यवहारिक परसीमन ना होने के कारण तहसील मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्रों की काफी लंबी दूरी है ऐसी स्थिति में यहां काम कराने आने वाले लोगों को समय के साथ साथ पैसे की बर्बादी भी झेलनी पड़ती है एक ही काम के लिए अनुविभागीय अधिकारी और तहसील कार्यालय बार-बार जाने पर उन्हें आर्थिक और समय का नुकसान होता है। अगर यह परिसीमन नए सिरे से करा कर इसमें परिवर्तन किया जाए तो ग्रामीणों सहित छात्र-छात्राओं व अभिभाषकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।