मुंबई, महिलाओं ने होम लोन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है लेकिन महामारी के चलते पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड से उनका मोह भंग होता जा रहा है। महिलाएं अपने क्रेडिट स्कोर पर भी गंभीरता से नजर रखे हुए हैं। यह बात ट्रान्सयूनियन सिबिल की एक स्टडी से सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जारी हुई सिबिल की रिपोर्ट दर्शाती है कि 2019 में कंज्यूमर लोन्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 23 फीसदी थी। 2020 में यह घटकर 19 फीसदी पर आ गई।
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इसी तरह महिलाओं द्वारा क्रेडिट कार्ड इन्क्वायरी जो 2019 में 13 फीसदी थी, वह 2020 में घटकर 12 फीसदी रह गई। लेकिन होम लोन के मामले में महिलाओं की हिस्सेदारी 2019 के 9 फीसदी से बढ़कर 2020 में 11 फीसदी हो गई। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रिटेल लोन्स में महिलाओं का कुल शेयर बढ़ रहा है। इस वक्त 4.7 करोड़ एक्टिव महिला बॉरोअर हैं। पिछले 6 सालों में महिला बॉरोअर्स का शेयर बढ़ा है और सितंबर 2020 में लगभग 28 फीसदी था। सितंबर 2014 में यह 23 फीसदी था।
महिलाएं क्यों मानी जाती हैं अच्छी ग्राहक
ट्रान्सयूनियन सिबिल की सीओओ हर्षला चंदोरकर का कहना है कि होम लोन में महिलाओं का योगदान बढ़ने के पीछे वजहों में कुछ राज्यों में घर खरीद में महिलाओं के लिए कम स्टांप ड्यूटी, कर्जदाताओं की ओर से बेहतर नियम व शर्तों की पेशकश और कम ब्याज दरें हैं।
इसके अलावा महिलाओं का पुरुषों की तुलना में उच्च एवरेज सिबिल स्कोर भी एक फैक्ट है, जो दर्शाता है कि महिलाओं की क्रेडिट हिस्ट्री बेहतर होती है। इसलिए उनकी ओर से लोन चुकता न करने की आंशका कम होती है। इस कारण महिलाएं बैंकों और क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस के लिए बेहतर ग्राहक होती हैं।