अब पुलिस जवानों की मौजूदगी में होगा जमीन का सीमांकन

 
रायपुर।

जिले में जमीन की नाप अब खाकी की मौजूदगी में होगी। राजस्व निरीक्षक संघ की गुहार के बाद पुलिस महकमे ने इस पर हामी भर दी है। लिहाजा अब वर्दीवालों के साथ जिला प्रशासन का अमला आवश्यक कार्रवाई कर सकेगा।
 
आजाद चौक क्षेत्र में पार्षद की गुंडागर्दी का मामला सामने आने के बाद राजस्व निरीक्षक संघ की ओर से पुलिस के समक्ष मांग रखी गई थी। एसपी कार्यालय के नाम चिट्ठी लिखे जाने के बाद पुलिस महकमे ने अनुमति दे दी है। संघ की ओर से मंगलवार को एसपी कार्यालय को आवेदन किया गया।

एएसपी ग्रामीण सुखनंदन राठौर से मुलाकात करते हुए संघ के पदाधिकारियों ने जमीन की नापजोख के दौरान अक्सर विवाद होने, जिानलेवा हमले का खतरा, शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न होने की स्थिति होने की जानकारी देते हुए सुरक्षा की मांग की।

इस पर एएसपी ने नापजोख के दौरान पुलिस बल तैनात रखने का आश्वासन दिया। एएसपी ने फोन कॉल के आधार पर सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।  एएसपी राठौर ने बताया कि शासकीय कार्य के लिए अलग-अलग विभाग काम कर रहे हैं। कहीं न कहीं पुलिस की भी सुरक्षा देने की जवाबदारी बनती है।

सभी अधिकारियों को थानों के नंबर जारी 

एसपी कार्यालय से सभी राजस्व अधिकारियों व पटवारी कार्यालय के लिए पुलिस थानों के फोन नंबरों सूची उपलब्ध करा दी गई है। थानों के साथ राजपत्रित अधिकारी व थानेदारों के नंबर भी उन्हें दिए गए हैं। संबंधित थाना क्षेत्र में जमीन सीमांकन की कार्रवाई के पहले राजस्व अधिकारी उन्हें जानकारी देंगे इसके बाद थानों से बल भेजा जाएगा।

गैरजमानतीय धाराओं में कार्रवाई

आजाद चौक वार्ड पार्षद आकाश दुबे पर राजस्व निरीक्षक से गुंडागर्दी करने का आरोप है। लिहाजा प्राथमिकी रिपोर्ट पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट के मामले में पुलिस ने गैरजमानतीय धाराओं पर कार्रवाई कर उसे जेल दाखिल कराया है। चुनावी वर्ष के मद्देनजर वार्डवार निरीक्षकों ने विवाद बढ़ने की आशंका जताई है। राजनीतिक प्रभाव बताकर अक्सर जनप्रतिनिधि भय पैदा करते हैं।

विवादों का निपटारा नहीं, राजस्व का नुकसान 

जमीन की नापजोख समय पर नहीं हो पाने की स्थिति में राजस्व विभाग को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जमीन रजिस्ट्री और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की एनओसी के लिए जमीन के सीमाकंन का मामला प्रभावित हो रहा है। राजस्व अधिकारियों के मुताबिक हर साल विवादों की वजह से करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है और हितग्राहियों की परेशानी बढ़ रही है।