यूपी : आगरा में मौत की आहटों के बीच गूंजीं जिंदगी की 154 किलकारियां

यूपी : आगरा में मौत की आहटों के बीच गूंजीं जिंदगी की 154 किलकारियां

 आगरा 
कोरोना की दहशत से उपजे दर्द के दरवाजे पर आज खुशी ने दस्तक दी। यह खुशी पाकर किसी की आंखों से आंसू बह निकले तो कोई हाथ जोड़कर निःशब्द रह गया। बस भाव-भंगिमाएं एक-दूजे की ओर देखती-मुस्कुराती बधाई हो बधाई को स्वर प्रदान करती रहीं। यह नजारा था आगरा के 132 साल पुराने लेडी लॉयल अस्पताल का, जहां शनिवार को भोर की पहली किरण से लेकर देर रात चांद की अठखेलियों तक डॉक्टरों और उऩके सहयोगियों की टीम ने एक ही दिन में 86 सिजेरियन और 68 सामान्य प्रसव कराकर अनूठा रिकॉर्ड अपने नाम कर किया।

नौ महीने से तपस्यारत एक-दो नहीं बल्कि 150 से अधिक प्रसूताएं लॉकडाउन की कठिन चुनौतियों से दो-चार होते हुए लेडी लॉयल अस्पताल पहुंचीं। सुबह छह बजे सिजेरियन ऑपरेशन के साथ-साथ सामान्य प्रसव का सिलसिला प्रारंभ हुआ। ज्यो-ज्यों समय बढ़ा, अस्पताल के प्रसूति वार्ड में किलकारियों की गूंज बढ़ती गई। मातृत्व सुख की मुस्कुराहट ने प्रसूताओं के दिल-ओ-दिमाग से दर्द का नाम-ओ-निशां मिटा दिया, तो डॉक्टर्स के चेहरे संतोष से भर दिए। डॉक्टर और उनके सहयोगी आते। नवजात के परिजनों को खुशखबरी देते और ग्लब्स बदलकर फिर काम में जुट जाते। यह सिलसिला रात 11 बजे तक अनवरत चलता रहा। अस्पताल के हर कौने से गूंजती किलकारियों में डॉक्टर्स इतने मशगूल थे कि उन्हें खाने-पीने की फुरसत मिली और न बाहरी दुनियां का हाल जानने की। असल कोरोना योद्धा की भांति जात-पात और धर्म से परे रहकर खुशियां बांटते रहे।

बनाया अनोखा रिकॉर्ड
लेडी लॉयल अस्पताल के डॉक्टर्स ने 132 साल के इतिहास में रिकार्ड बना लिया। पंजीकृत 45 की जगह 86 प्रसव कराए गए। यहां रोज औसतन 15 सामान्य प्रसव होते हैं। लॉकडाउन में एसएनएमसी और निजी अस्पतालों के प्रसवों का भी बोझ लेडी लॉयल ने उठा रखा था। इस कार्य में 16 सर्जन और 85 नर्स व स्टाफ ने सभी व्यवस्थाएं संभालीं। यह कार्य इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इस कठिन दौर में कई डॉक्टर्स मरीजों से लगातार दूरियां बना रहे हैं।

और बेटे का नाम रख दिया रमजान
रमजान के पाक महीने में अल्लाह पाक ने बेटा दिया है। इसका नाम रमजान ही रख दिया। मेरी पत्नी और में बहुत खुश हैं। पिता रहमान को मानो शब्द ही नहीं मिल रहे थे। बोले- मेरी बीबी और बच्चा दोनों सुरक्षित है। शुक्रगुजार हूं डॉक्टरों का। परिवार में यह पहला बच्चा है। इतना ही कुछ ने मौके पर किसी को इबादत नाम दिया तो किसी को दुआ।

जुडवां को नाम दिया लॉक-डाउन
अधीक्षिका डॉ. कल्याणी मिश्रा ने बताया कि तीन दिन पहले जब रात को एक महिला को भर्ती कराया गया था। उसके दो बच्चे हुए हैं। उन्होंने अपने बच्चों के नाम लॉक और डाउन ही रख दिए। पूरे परिसर में बस यही गूंजता है कि लॉक डाउन को देख लिया। सिजेरियन हुए हैं। दो दिन बाद छुट्टी मिलेगी।

पहला प्रसव 6.09 बजे, आखिरी रात 11.40 बजे किया 
लेडी लॉयल अस्पताल में चिकित्सक सुबह चार बजे से तैयार होकर पहुंचे गये थे। खून एवं अन्य जांचों की फाइलें सेनेटाइज करके रखी गई थीं। पांचों ओटी को सेनेटाइज कराया। इसके बाद पहला प्रसव राजपुर की रीना का हुआ। डॉ. संगीता ने बताया कि गायत्री मंत्र का जाप करते हुए पहले प्रसव की शुरूआत की। लगभग आधा घंटा लगा। उसको बेटी हुई। डॉक्टर्स के मुंह से निकला लक्ष्मी ने रख दिया हमारी ओटी में पांव। गूंजी पहली किलकारी। बच्ची का नाम किलकारी ही रख दिया गया। वहीं देर रात करीब 11.40 बजे रात को आखिरी ऑपरेशन शहीद नगर की अमायरा का किया गया। दिनभर में 86 सिजेरियन किए गए।