पुलिस कस्टडी में मौत: पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त नहीं-पूर्व CM शिवराज
भोपाल
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैरागढ़ पुलिस से पिटाई के बाद हुई शिवम मिश्रा की मौत के मामले में कहा है कि इस घटना में पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त नहीं है। घटना की न्यायिक जांच होना चाहिए। सरकार की संवेदनाएं मर चुकी हैं और पुलिस प्रशासन निरंकुश हो गया है। जो घटनाक्रम सामने आया है, उसमें ऐसा अपराध नहीं बनता कि युवक को पीट पीटकर मार दें। परिजन आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस प्रताड़ित कर रही है।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के बेटे और भतीजे के मामले में शिवराज ने कहा कि निष्पक्ष जांच होना चाहिए। राजनीतिक विद्वेष के साथ सरकार कार्यवाही कर रही है और बीजेपी कार्यकर्ताओं को चुन चुन कर प्रताड़ित किया जा रहा है। इस तरह के काम नहीं होने चाहिए। पूर्व सीएम शिवराज ने अंबाह और दमोह की घटना पर भी पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मुरैना के पोरसा में गरीब महिला गुहार करते थक गई तो आग में कूद गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या गरीबों को ऐसे ही सताया जाएगा। दमोह में आदिवासी को सात दिन से जेल में बंद कर रखा है। अन्याय की अति हो गई है।
भोपाल पुलिस की बर्बता, लगातार हो रही उजागर
भोपाल की पुलिस बर्बता लगातार उजागर हो रही है। करीब दस दिन पहले मांडवा बस्ती में नौ साल की मासूम की हत्या के बाद भी पुलिस की लापरवाही उजागर हुई थी। इस मामले में अफसरों ने दोषी पुलिसकर्मियों कर सस्पेंड कर दिया था। इससे पहले मामूली एक्सीडेंट को लेकर 6 जून को कोलार पुलिस ने बिल्डर मुकुल पाल के साथ जमकर मारपीट की थी। इस मामले में बिल्डर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उसकी सोने की चेन और पर्स छींन ली थी। वहीं कोतवाली पुलिस की प्रताड़ना से परेशान होकर चोरी के वाहन में संदेही अल्ताफ ने जहर खा लिया था। पहले तो थाना प्रभारी शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इसलिए पुलिस ने उसे आरोपी नहीं बनाया जा सका। जब मामले में तूल पकड़ा तो टीआई ने अल्ताफ को ही चोरी का आरोपी बना लिया। इतना ही नहीं उसके खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज कर लिया। अब पुलिस जांच करने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ रही है।
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