सड़कों पर विचरण करने वाले मवेशी ट्रैफिक में बन रहे अवरोध

सड़कों पर विचरण करने वाले मवेशी ट्रैफिक में बन रहे अवरोध

गंजबासौदा
सडकों पर विचरण करते आवारा मवेशियों को देखकर ऐसा लगता है जैसे यह सडकों के राजा हैं और सडकें इनकी निजी मिल्कियत। जिससे यह जब जहां चाहे सडकों पर आजाद विचरण करें और जब थक जाऐं तो बीच सडक पर कीं भी आराम फरमाने अपनी चैपाल जमा लें यू ंतो नगर की सडकों पर आवारा विचरण करते आवारा मवेशियों को पकडकर कांजी हाऊस में बंद करने का काम नगरपालिका करती थी ।  लेकिन नगर का एक कांजी हाउस जो पुराने बस स्टैण्ड पर था उसे भी नपा द्वारा मिटवा दिया गया। जिससे अब मवेशी सड़कों पर ही भटकते रहते हैं। यही नहीं जब नपाकर्मियों द्वारा कोई कार्यवाही की जाती है तो इस काम में लगाये गये नपा कर्मी वकायदा अपने अपने परिचित प्रेसकर्मियों को खबर करते हैं और जैसे ही मवेशियों को घेर कर ले जाते इनके फोटो अखबारों में प्रकाशित होते हैं वैसे ही मानो इनकी कार्यवाही समाप्त हो जाती है। इसके बाद चंद दिनों में ही आवारा मवेशी फिर से सडकों पर आजाद घूमते नजर आने लगते हैं जो यातायात में अवरोध उत्पन्न करते हैं।

नगर के राजेन्द्र नगर चौराहा, सिरोंज चौराहा, गांधी चौक, जयस्तंभ चौक, नेहरू चौक और सुभाष चौक आवारा मवेशियों की खास पसंदीदा जगह है। जहां इनकी चौपाले लगती हैं। इन स्थानों पर दिन हो या रात कभी भी मवेशियों को झुण्ड के रूप  में बीच सडकों पर आराम फरमातें देखा जा सकता है। जो बीच सड़क पर कब्जा जमाए थकान मिटाते रहते हैं।

नगर के नेहरू चैक, बरेठ रोड, हनुमान चैक, जयस्तंभ चैक, सावरकर चैक सहित अन्य मुख्य मार्गों पर बनी फुटपातों पर सब्जी विक्रेता अपने हाथ ठेले लगाते हैं वहीं सडी गली सब्जियां एवं पत्ते सडक पर ही डाल देते हैं जिससे उन्हें खाने के लालच में भी आवारा मवेशी एकत्रित होकर उन्हें खानें लगते हैं और सब्जियों को लेकर आपस में लडते झगडते हैं। जिससे भी आवागमन में भारी असुविधायें होती हैं।

मुख्य मार्गों पर यहां वहां स्वच्छंद विचरण करते और सडकों के बीच आराम फरमाते आवारा मवेशी वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं । दो पहिया या चार  पहिया वाहन चालक सडकों से गुजरते हैं  तो उन्हे कई स्थानों पर रूककर सडक पर बैठे मवेशियों को भगाना पडता है। जब कहीें उनका मार्ग सुगम हो पाता है। नगर की सडकों पर बेंखौफ आजाद विचरण करने वाले आवारा मवेशियों मे कई सांड तो ऐसे हैं की नागरिक उन्हें लाट साहब के नाम से पुकारते है और इनसे खासा खौफ खाते है। क्योकि यह जब चाहे तब फल,फ्रूट और सब्जी विक्रताओ के हाथ ठेलों पर धावा बोल देते है और तब तक नही हटते जब तक की यह खूब छक कर पेट न भर लें।

नगर के सैकडों पशुपालकों द्वारा पशुओं को तो पाल लिया जाता है और पशु जब तक दूध देता है जब तक तो उसकी देखाभाली कर घर पर रखा जाता है।

लेकिन जैसे ही वह दूध देना बंद  कर देती है तो उसे आवारा सडकों पर छोड़ दिया जाता है। इस कारण भी नगर में आवारा मवेशियों की संख्या बढती ही जा रही है। नगर की सडको पर स्वछंद विचरण करने वाले आवारा मवेंशियों पर नपा की व्यापक कार्यवाही कें अभाव में यह हालात बने हुए है यदि इन मवेशियों को प्रति सप्ताह पकडकर गौशाला या फिर कांजी हाउस भेजा जाए तो इन्हे वहां भरपूर भोजन भी मिलेगा और नगर की सडकें भीे इनसे मुक्त हो जांएगी।