सेवा की कहानी : खेतिहर श्रमिक परिवार की रमावती हैं अपनी दुकान की संचालक

सेवा की कहानी : खेतिहर श्रमिक परिवार की रमावती हैं अपनी दुकान की संचालक

कोरिया, जिले के वनांचल जनपद पंचायत सोनहत के ग्राम पंचायत अकलासरई में रहने वाले किसान परिवार की एक महिला जो पहले सिर्फ एक खेतिहर श्रमिक थी। वहीं रमावती दीदी अब बिहान की मदद पाकर अपने ही दुकान की संचालक बन गई हैं। पहले हर छोटे बड़े खर्च के लिए आर्थिक संकट का सामना करने वाली श्रीमती रमावती विश्वकर्मा अब अपने खर्च के साथ परिवार के खर्चों में भी हाथ बंटाती हैं। यह उनके आत्मविश्वास और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से मिली मदद से संभव हो सका है। एक श्रमिक महिला अब अपने व्यवसाय से स्वावलंबी जीवन में अग्रसर हो रही है।

कठिन आर्थिक जीवन
पहले केवल कृषि आधारित आजीविका पर निर्भर इस परिवार के पास हमेशा आर्थिक तंगी बनी रहती थी। अपने खेतों में परंपरागत खेती के बाद खाली रहने वाला यह परिवार अपने आजीविका के लिए शासन की अकुशल श्रम देने वाली योजनाओं पर निर्भर रहता था। ऐसे में आय के स्रोत सीमित थे। यह जीवन का कठिन दौर आर्थिक तौर पर रमावती विश्वकर्मा और उनके परिवार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था।

बिहान से जुड़ाव
कुछ वर्ष पूर्व गांव में महिलाओं को स्व सहायता समूह से जुड़ने और उनकी आर्थिक गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिषन बिहान से कमली दीदी का जुड़ाव हुआ। अपने गांव बने महिला स्व सहायता समूह से जुड़कर इन्होने अपने साथियों के साथ सामान्य लेनदेन आरंभ किया। इसके बाद इनका विष्वास बढ़ा और इन्होने समूह के माध्यम से पहले 6 लाख रूपए का सामूहिक ऋण प्राप्त किया। इसी राषि से इन्होने घर में किराने की दुकान आरंभ की इससे इनकी नियमित आय सुनिष्चित हुई है।

सुनिष्चित आय से संबल
ग्राम पंचायत अकलासरई में रहने वाली श्रीमती रमावती विष्वकर्मा ने बताया कि बिहान से जुड़कर जबसे उन्होने अपनी दुकान संचालित की है। अब उनके पास अपने दैनिक खर्च के लिए कोई कमी नहीं है। साल भर में एक लाख रूपए से ज्यादा की आय अर्जित कर लेने से अब उनका आत्मविश्वास और पारिवारिक मान बढ़ गया है।