नए अवतार में नजर आए AAP सांसद राघव चड्ढा, बने डिलीवरी बॉय, घर-घर पहुंचाया सामान
मोहाली, पंजाब से ‘आप’ सांसद राघव चड्ढा ने राजनीति के बोर्डरूम से निकलकर जमीन पर उतरने का फैसला किया है। उन्होंने डिलीवरी बॉय की ड्रेस पहनकर और सामान की डिलीवरी कर उन लाखों गिग वर्कर्स का दर्द जिया, जो दिन-रात काम के बावजूद कम कमाई और सुरक्षा के अभाव में जीने को मजबूर हैं।
पंजाब के मोहाली में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा एक बिल्कुल नए अवतार में नजर आए। उन्होंने खुद डिलीवरी बॉय की यूनिफॉर्म पहनी और आम कामगारों की तरह लोगों के घरों तक सामान पहुंचाया। इस अनूठी पहल का उद्देश्य उन कठिनाइयों को समझना था जिनका सामना इस क्षेत्र में लगे लाखों युवा प्रतिदिन करते हैं।
राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ पर एक 40 सेकंड का वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि वे डिलीवरी बॉय की ड्रेस पहनकर घर से निकलते हैं, हेलमेट पहनते हैं और एक अन्य डिलीवरी पार्टनर के स्कूटर पर पीछे बैठकर बैग थामे अपनी मंजिल की ओर रवाना होते हैं। उन्होंने ऑर्डर पिक किया और उसे ग्राहक तक पहुंचाया। वीडियो के अंत में उन्होंने ‘स्टे ट्यून’ (Stay Tuned) लिखकर भविष्य में इस मुद्दे पर और अधिक जानकारी देने का संकेत दिया है।
राघव चड्ढा की इस सक्रियता के पीछे एक वायरल वीडियो की बड़ी भूमिका है। दरअसल, सितंबर में एक डिलीवरी बॉय हिमांशु थपलियाल का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने अपनी आपबीती सुनाई थी। हिमांशु ने बताया था कि वह 15 घंटे से ज्यादा काम करता है और 50 किलोमीटर तक स्कूटर चलाकर दिनभर में करीब 28 डिलीवरी करता है। इतनी कड़ी मशक्कत के बाद उसे दिन के अंत में मात्र 730 रुपये ही मिलते थे।
गिग वर्कर्स के शोषण के मुद्दे को भी गंभीरता से लिया
जब यह वीडियो दिसंबर में राघव चड्ढा के संज्ञान में आया, तो उन्होंने न केवल इसे सोशल मीडिया पर उठाया बल्कि गिग वर्कर्स के शोषण के मुद्दे को भी गंभीरता से लिया। सांसद ने हिमांशु को अपने घर खाने पर बुलाया और उसके साथ बैठकर भोजन करते हुए उसकी समस्याओं और काम के हालातों पर लंबी चर्चा की। उन्होंने इस बातचीत का वीडियो भी साझा किया था ताकि लोग जान सकें कि ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में ये कामगार किस स्थिति में हैं।
संसद के शीतकालीन सत्र में भी मजबूती से उठाया
राघव चड्ढा ने केवल प्रतीकात्मक विरोध नहीं किया, बल्कि इस मुद्दे को देश की सबसे बड़ी पंचायत, यानी संसद के शीतकालीन सत्र में भी मजबूती से उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि इन वर्कर्स की हालत दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर हो गई है। उन्होंने तर्क दिया कि डिलीवरी बॉय, राइडर, ड्राइवर और टेक्नीशियन भी बाकी कर्मचारियों की तरह सम्मान, सुरक्षा और उचित पारिश्रमिक के हकदार हैं।
सांसद ने विशेष रूप से कंपनियों द्वारा शुरू किए गए ’10 मिनट डिलीवरी कल्चर’ को खत्म करने की मांग की। उनका मानना है कि इस तरह के दबाव से राइडर्स की जान जोखिम में पड़ती है और कंपनियों को अपने कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ देने चाहिए।
केंद्र सरकार ने जारी किया सोशल सिक्योरिटी ड्राफ्ट
सांसद राघव चड्ढा की इस मुहिम और बढ़ते दबाव का सकारात्मक असर देखने को मिला है। 4 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार ने ड्राफ्ट सोशल सिक्योरिटी रूल्स जारी किए। यह कदम गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के काम को पहचान देने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
राघव चड्ढा ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए इसे अपने संघर्ष की जीत बताया है। उनका यह ‘डिलीवरी बॉय’ वाला अवतार इसी लड़ाई को अगले स्तर पर ले जाने की एक कोशिश है ताकि वे कह सकें कि उन्होंने “बोर्डरूम से दूर, उनका दिन जिया है।”
bhavtarini.com@gmail.com
