एथेंस में आईएएसआईए प्रबंधन बोर्ड की बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने वैश्विक प्रशासन को सशक्त बनाने की रूपरेखा रखी

एथेंस में आईएएसआईए प्रबंधन बोर्ड की बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने वैश्विक प्रशासन को सशक्त बनाने की रूपरेखा रखी

अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग, विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने और वर्ष 2030 तक संस्थागत सुधारों पर दिया जोर

जयपुर। राजस्थान के मुख्य सचिव एवं अंतरराष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान (आईआईएएस) के अध्यक्ष वी. श्रीनिवास ने सोमवार को ग्रीस की राजधानी एथेंस में आईएएसआईए प्रबंधन बोर्ड की बैठक को संबोधित करते हुए वैश्विक लोक प्रशासन को सशक्त बनाने की रूपरेखा प्रस्तुत की। आईएएसआईए-2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर उन्होंने कहा कि शोध, संस्थागत सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। 

मुख्य सचिव ने बदलती प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और सार्वजनिक संस्थानों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने आईआईएएस की भारतीय अध्यक्षता के दौरान विकसित किए जा रहे आईआईएएस शासन सूचकांक को एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इससे दुनियाभर के सार्वजनिक संस्थानों के प्रदर्शन का आकलन करने और सुधार की संभावनाओं की पहचान करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस सूचकांक की प्रारंभिक रूपरेखा एथेंस सम्मेलन में प्रस्तुत की जाएगी, जबकि इसकी विस्तृत कार्यप्रणाली, निष्कर्ष और विभिन्न देशों का तुलनात्मक विश्लेषण नवंबर 2026 में सियोल में आयोजित होने वाले आईआईएएस सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालयों, सिविल सेवा प्रशिक्षण अकादमियों और सरकारी संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए आईएएसआईए प्रैक्टिस नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक शोध का उपयोग व्यावहारिक प्रशासनिक सुधारों में होना चाहिए ताकि इसका सीधा लाभ आमजन तक पहुंचे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शोध समूहों को अधिक सक्रिय बनाने, विभिन्न देशों के बीच ज्ञान साझा करने तथा विकासशील देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

वी. श्रीनिवास ने कहा कि ग्लोबल साउथ से आईआईएएस की पहली अध्यक्षता भारत को मिलने के बाद संस्थान की गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में नई दिल्ली में आयोजित आईआईएएस सम्मेलन में 58 देशों के 758 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इसके बाद ग्लासगो और हाल ही में रोम में ईजीपीए के सफल सम्मेलन आयोजित हुए। उन्होंने कहा कि आगामी सियोल सम्मेलन को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है, जो वैश्विक प्रशासनिक सहयोग में आईआईएएस की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

वर्ष 2030 में आईआईएएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए मुख्य सचिव ने संस्थान को प्रशासनिक शिक्षा, शोध और नवाचार के अग्रणी वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सशक्त संस्थागत साझेदारी, नैतिक नेतृत्व और निरंतर प्रशिक्षण भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण आधार होंगे। उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम, नागरिक प्रथम’ के दृष्टिकोण को प्रशासन के केंद्र में रखने तथा सरकारी सेवाओं को आमजन के लिए अधिक सरल और सुलभ बनाने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान वी. श्रीनिवास ने आईएएसआईए की अध्यक्ष प्रो. डॉ. लीजेल लुएस को बधाई दी तथा आईआईएएस के महानिदेशक डॉ. सोफियाने सहरौई के नौ वर्षों के योगदान की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘बदलते विश्व के लिए शासन पर पुनर्विचार’ विषय पर आयोजित आईएएसआईए-2026 सम्मेलन वैश्विक प्रशासनिक सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगा।