कर चोरी के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग का बड़ा प्रहार, छह प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई

कर चोरी के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग का बड़ा प्रहार, छह प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई

बिक्री छिपाने, बिना बिल कारोबार और गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामलों में विभाग की सख्ती

जयपुर। प्रदेश में कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने एवं राजस्व हितों की सुरक्षा के लिए वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है। विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में छह व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर की गई सर्वे एवं जांच कार्रवाई के दौरान कुल 1 करोड़ 22 हजार रुपये की राशि करदाताओं द्वारा स्वैच्छिक रूप से जमा कराई गई अथवा इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा की गई।
कार्रवाई के दौरान बिक्री एवं वास्तविक कारोबार छिपाने, बिना उचित बिल के माल की खरीद-बिक्री, स्टॉक में अंतर तथा नियम विरुद्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने जैसी अनियमितताओं की जांच की गई। विभाग द्वारा संबंधित प्रतिष्ठानों के लेखा अभिलेखों एवं कर विवरणियों का विस्तृत सत्यापन किया जा रहा है।

अजमेर में आतिशबाजी कारोबारी से 30 लाख रुपये की स्वैच्छिक राशि जमा

अजमेर के केसरगंज स्थित मैसर्स रेवतीलाल सत्येन्द्रकुमार जैन के प्रतिष्ठान पर संभावित अघोषित स्टॉक एवं वित्तीय वर्ष 2022-23 तथा 2023-24 की जीएसटी विवरणियों में इनपुट टैक्स क्रेडिट संबंधी अंतर की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई। प्रकरण में प्रारंभिक संभावित कर देयता 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई थी। जांच के दौरान संबंधित करदाता द्वारा 30 लाख रुपये की राशि स्वैच्छिक रूप से जमा कराई गई।

इसी प्रकार अजमेर जिले के किशनगढ़ स्थित मैसर्स बिहारी प्रोडक्ट्स पर मार्बल, ग्रेनाइट एवं खनिज उत्पादों के कारोबार से संबंधित कर विवरणियों की जांच की गई। इसमें विभिन्न वित्तीय वर्षों के दौरान जीएसटीआर-3बी एवं जीएसटीआर-2बी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का अंतर तथा घोषित कर देयता में विसंगतियां जांच के दायरे में रहीं।

करदाता द्वारा अतिरिक्त आईटीसी संबंधी विसंगति स्वीकार करते हुए 11 लाख 70 हजार रुपये कर एवं 1 लाख 52 हजार रुपये ब्याज सहित कुल 13 लाख 22 हजार रुपये डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराए गए। शेष विसंगतियों के सत्यापन के लिए सात दिवस में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

मकराना में बिना उचित बिल कारोबार की आशंका, 20 लाख रुपये जमा

डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना स्थित मैसर्स अमन मार्बल इंडस्ट्रीज पर बिना उचित बिल के माल की खरीद-बिक्री एवं कर देयता के समायोजन में अत्यधिक आईटीसी के उपयोग की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई।
जांच के दौरान फर्म के प्रतिनिधि द्वारा सत्यापित विसंगतियों को स्वीकार करते हुए 20 लाख रुपये इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा कराए गए। विभाग ने आगामी जांच के लिए प्रतिष्ठान से कुछ खुले कागजात एवं दस्तावेज जब्त किए हैं। संबंधित करदाता को खरीद-बिक्री के बिल, लेखा पुस्तकों एवं अन्य आवश्यक अभिलेखों के सत्यापन के लिए समन भी जारी किया गया है।

जयपुर में प्लास्टिक उत्पाद निर्माता से 14.18 लाख रुपये जमा

जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित मैसर्स मनोहर लाल एंड संस पर जीएसटी अधिनियम की धारा 17(5) के अंतर्गत प्रतिबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने तथा संभावित स्टॉक विसंगतियों को लेकर जांच की गई।

कार्रवाई के दौरान करदाता द्वारा अप्रैल से सितम्बर 2026 की अवधि के लिए 12 लाख 33 हजार रुपये कर एवं 1 लाख 85 हजार रुपये जुर्माने सहित कुल 14 लाख 18 हजार रुपये डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराए गए। शेष अभिलेखों एवं लेखा विवरणों के सत्यापन के लिए संबंधित करदाता को समन जारी किया गया।

बेगूं में किराना कारोबारी से 11.20 लाख रुपये जमा

चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं स्थित पारस जनरल स्टोर पर वास्तविक बिक्री एवं कारोबार छिपाने की आशंका के आधार पर जांच की गई। प्रारंभिक स्तर पर लगभग 12 लाख रुपये की संभावित कर देयता आंकी गई।
जांच के दौरान सामने आई विसंगतियों के संबंध में फर्म के प्रतिनिधि से स्पष्टीकरण लिया गया। इसके पश्चात करदाता द्वारा 11 लाख 20 हजार रुपये डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराए गए। विभाग ने जीएसटी अधिनियम की धारा 70 के तहत समन जारी कर संबंधित लेखा पुस्तकों एवं दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

जैतारण में बिक्री छिपाने और स्टॉक में कमी का मामला, 11.62 लाख रुपये जमा

जैतारण स्थित मैसर्स गोदावरी एंटरप्राइजेज पर घी, खाद्य तेल, सूखे मेवे एवं किराना सामग्री के कारोबार में बिक्री छिपाने की आशंका के आधार पर जांच की गई।

कार्रवाई के दौरान भौतिक स्टॉक के सत्यापन में माल की कमी पाई गई तथा संबंधित बिक्री के कर चालान जारी नहीं किए जाने की बात सामने आई। करदाता द्वारा प्रारंभिक स्तर पर अनियमितता स्वीकार करते हुए 10 लाख 10 हजार रुपये कर एवं 1 लाख 52 हजार रुपये जुर्माने सहित कुल 11 लाख 62 हजार रुपये डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराए गए।

विभाग द्वारा शेष दस्तावेजों एवं भौतिक स्टॉक के मूल्यांकन के लिए संबंधित करदाता को 23 अक्टूबर को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

कर चोरी करने वालों पर जारी रहेगी सख्त कार्रवाई

वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा सभी प्रकरणों में संबंधित करदाताओं के खरीद-बिक्री अभिलेखों, कर विवरणियों, स्टॉक एवं इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तृत सत्यापन किया जा रहा है। जांच में सामने आने वाली शेष कर देयता के संबंध में नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।

विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि कर अपवंचन, बिना बिल कारोबार, बिक्री छिपाने एवं गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने जैसी अनियमितताओं के विरुद्ध जांच एवं प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। राजस्व हितों की सुरक्षा के साथ-साथ कर व्यवस्था में पारदर्शिता एवं ईमानदार करदाताओं के हितों का संरक्षण विभाग की प्राथमिकता है।