लंपी रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए अंतर-विभागीय समन्वय बैठक आयोजित

लंपी रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए अंतर-विभागीय समन्वय बैठक आयोजित

जयपुर। प्रदेश में गौवंश में फैल रहे लंपी स्किन डिजीज के प्रभावी नियंत्रण, रोकथाम एवं उपचार के लिए विभिन्न स्टेकहोल्डर विभागों के बीच बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से बुधवार को सचिवालय स्थित मंथन कक्ष में बैठक आयोजित की गई। 

बैठक में लंपी रोग की वर्तमान स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों में की जा रही कार्यवाही, टीकाकरण, उपचार, रोग की निगरानी तथा संक्रमण की रोकथाम के लिए विभागों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में पशुपालन विभाग सहित संबंधित स्टेकहोल्डर विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर पर की जा रही कार्यवाही की जानकारी दी।

पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ सुरेश चंद मीना ने कहा कि विभाग द्वारा लंपी रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए फील्ड स्तर पर सतत निगरानी, पशुओं का उपचार, टीकाकरण तथा पशुपालकों को आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में पशुओं के आवागमन को रोकने के लिए चेक पोस्ट की स्थापना और स्थानीय हाट मेलों में पशुओं की उपस्थिति पर प्रतिबंध, मृत पशुओं का सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण, शेड, पानी और चारे की व्यवस्था, वेक्टर कंट्रोल हेतु फॉगिंग की व्यवस्था तथा प्रचार प्रसार आदि के लिए विभिन्न विभागों से सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि अंतर-विभागीय समन्वय को और मजबूत कर रोग की सूचना से लेकर उपचार एवं नियंत्रण तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी गौवंशों की मृत्यु दर बहुत कम है और रिकवरी दर अच्छी है। हमें अपने प्रयासों से इसे अन्य जिलों में फैलने से रोकना है।

बैठक में लंपी रोग के नियंत्रण और रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों के दायित्वों के संबंध में भी विस्तृत चर्चा हुई जिसमें निर्धारित किया गया कि प्रभावित क्षेत्रों में निराश्रित गौवंश के लिए आइसोलेशन केंद्र की स्थापना और संचालन, शेड, पानी, चारा तथा सफाई, वेक्टर कंट्रोल के लिए फॉगिंग, मृत पशुओं के शवों का सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण आदि कार्य पंचायतीराज विभाग तथा स्थानीय निकाय के हैं जबकि पशुओं के अंतर्राज्यीय और अंतर जिला आवागमन पर नियंत्रण, पशुपालन विभाग के साथ आवागमन के रास्तों पर चेक पोस्टों की स्थापना, पशु परिवहन की निगरानी तथा मानव संसाधनों की उपलब्धता, जिले में पशु हाट तथा पशु मेलों के आयोजन पर रोक, प्रशासन द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करना आदि गृह विभाग के दायित्व हैं।

बैठक में बताया गया कि गोपालन विभाग तथा आरसीडीएफ का दायित्व गौशालाओं में संधारित गौवंशीय पशुओं में रोग के नियंत्रण के लिए जैव सुरक्षा उपायों की पालना सुनिश्चित कराना, गौशालाओं तथा सहकारी समितियों में रोग के नियंत्रण तथा रोकथाम के लिए आवश्यक प्रचार प्रसार और जनजागरूकता फैलाना, रोग नियंत्रण तथा रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग, गौशाला प्रबंधन एवं अन्य हितधारकों के साथ समन्वय, आइसोलेशन सेंटर की व्यवस्था आदि का निर्वहन करना है। इसके अलावावन विभाग के प्रमुख दायित्वों में वन्य जीव क्षेत्र के लगभग 05 किलोमीटर की परिधि में टीकाकरण एवं अन्य रोग नियंत्रण कार्य हेतु समन्वय, वेक्टर कंट्रोल छिड़काव, फॉगिंग, प्रचार प्रसा तथा जनजागरूकता और वन क्षेत्र में मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण आदि आते हैं।

बैठक में गृह विभाग के संयुक्त सचिव सहित वन विभाग, पंचायतीराज विभाग, आरसीडीएफ, गोपालन तथा पशुपालन विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। संबंधित विभागों के अधिकारियों ने लंपी रोग नियंत्रण के लिए संयुक्त रूप से प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।