सफल सार्वजनिक-निजी सहभागिता और एचपीवी पायलट परियोजना से कैंसर स्क्रीनिंग के क्षेत्रीय प्रदर्शन में राजस्थान दूसरे स्थान पर
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के 'सभी के लिए स्वास्थ्य' के विजन को साकार करने की दिशा में प्रदेश का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पूर्ण प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि व्यापक सार्वजनिक-निजी सहभागिता तथा उन्नत एचपीवी पायलट परियोजना के माध्यम से कैंसर स्क्रीनिंग के क्षेत्रीय प्रदर्शन में राजस्थान ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश में अब तक 1.58 करोड़ स्तन कैंसर तथा 3.33 करोड़ मुख कैंसर स्क्रीनिंग की जा चुकी है। यह क्रमशः निर्धारित लक्ष्य का 84 और 87 प्रतिशत है।
राष्ट्रीय गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के अंतर्गत राजस्थान में विकेंद्रीकृत कैंसर उपचार एवं देखभाल संबंधी बुनियादी ढांचे का व्यापक विस्तार किया जा रहा है। इस पहल से सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में समेकित देखभाल व्यवस्था को शामिल करते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने प्रारंभिक जांच, सार्वजनिक एवं निजी चिकित्सा संस्थानों के बीच समन्वय तथा स्थानीय स्तर पर उपचार सुविधाओं का विस्तार किया है। इसके माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्तन, मुख एवं सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों की रोकथाम एवं समय पर पहचान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ग्लोबोकैन की नवीनतम कैंसर रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में प्रतिवर्ष स्तन कैंसर के अनुमानित 4,630 नए मामले सामने आते हैं। इसकी वार्षिक दर प्रति लाख जनसंख्या पर 31 मामले है, जो राष्ट्रीय औसत 31.2 के लगभग समान है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर सक्रिय पहल की जा रही है। इसके तहत 30 वर्ष एवं इससे अधिक आयु की महिलाओं की स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि प्रारंभिक जांच से लेकर उपचार तक की सुविधाएं यथासंभव उनके नजदीक उपलब्ध करवाई जा सकें।
इस रोकथाम एवं जांच अभियान का प्रमुख आधार प्रदेश में संचालित 15,297 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) तथा 19,902 स्वास्थ्य संस्थानों का व्यापक नेटवर्क है। जमीनी स्तर पर इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 55 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं 15 हजार एएनएम को क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन (सीबीई) का प्रशिक्षण दिया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल 1,58,51,263 महिलाओं की स्तन कैंसर स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इस प्रकार 1.87 करोड़ के निर्धारित लक्ष्य का 84 प्रतिशत हासिल किया जा चुका है तथा जांच के दौरान 6,095 पुष्ट मामले सामने आए हैं। पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली एवं मध्य प्रदेश की तुलना में संचयी स्क्रीनिंग प्रदर्शन के आधार पर राजस्थान दूसरे स्थान पर है।
इसी प्रकार ओरल एवं सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए भी व्यापक अभियान संचालित किया जा रहा है। मानक ओरल विजुअल एग्जामिनेशन पद्धति के माध्यम से अब तक 3,33,68,756 व्यक्तियों की ओरल कैंसर स्क्रीनिंग की गई है, जो निर्धारित लक्ष्य का 87 प्रतिशत है। इसमें 20,060 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। वहीं, विजुअल इंस्पेक्शन विद एसिटिक एसिड (वीआईए) पद्धति से 91,52,970 महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच की गई है, जिसमें 10,214 पॉजिटिव मामले चिन्हित किए गए हैं।
सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग, जो वर्तमान में निर्धारित लक्ष्य का 48 प्रतिशत है, को गति देने के लिए राजस्थान ने राज्यव्यापी एचपीवी डीएनए आधारित स्क्रीनिंग की उन्नत पहल की है। इसके तहत जयपुर, दौसा, अजमेर, बीकानेर एवं नीम का थाना सहित पांच पायलट जिलों में हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से अब तक 20 हजार से अधिक महिलाओं की सफलतापूर्वक स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर एचआईवी के साथ जीवनयापन कर रही 19,222 महिलाओं की लक्षित सर्वाइकल स्क्रीनिंग की गई है। इनमें वीआईए जांच में पॉजिटिव पाई गई 438 महिलाओं को तत्काल उपचार से जोड़ा गया है।
सर्वाइकल कैंसर पूर्व अवस्था के घावों का द्वितीयक स्तर पर ही उपचार सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी सात प्रशासनिक संभागों में 70 उन्नत उपचार उपकरण स्थापित किए गए हैं। इनमें 67 थर्मल एब्लेशन उपकरण शामिल हैं, जिन्हें 42 जिला अस्पतालों, 16 उप जिला अस्पतालों तथा चयनित मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध करवाया गया है। इसके अतिरिक्त जयपुर, बीकानेर एवं झालावाड़ के मेडिकल कॉलेजों में तीन लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सीजन प्रोसीजर (लीप) मशीनें स्थापित की गई हैं।
प्रदेश में जिला कैंसर केयर यूनिट (डीसीसीयू) का सभी 61 जिला अस्पतालों में पूर्ण संचालन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये केंद्र विशेष डे-केयर कैंसर सेंटर के रूप में कार्य कर रहे हैं। यहां मरीजों के पंजीकरण, कीमोथेरेपी एवं प्रशामक देखभाल (पैलिएटिव केयर) की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे मरीजों को बार-बार दूरस्थ चिकित्सा संस्थानों तक जाने की परेशानी, आर्थिक भार एवं मानसिक तनाव से राहत मिल रही है। अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन डे-केयर केंद्रों के माध्यम से 48,947 ओपीडी परामर्श दिए गए, 3,371 विशिष्ट कैंसर मरीजों का पंजीकरण किया गया तथा कीमोथेरेपी के 16,356 इंट्रावेनस एवं ओरल साइकल संचालित किए गए। इसके साथ ही 6,023 मरीजों को पैलिएटिव केयर एवं लक्षण प्रबंधन संबंधी सेवाएं प्रदान की गईं। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भी यह अभियान निरंतर जारी रहा।
ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की दूरी को कम करने के लिए राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण एमओयू किए हैं। इनमें निम्स हॉस्पिटल, महात्मा गांधी हॉस्पिटल, भगवान महावीर हॉस्पिटल तथा मरुधर हॉस्पिटल शामिल हैं। इनके माध्यम से मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए जांच सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही डिजिटल मैमोग्राफी, एक्स-रे, कोल्पोस्कोपी एवं एंडोस्कोपी उपकरणों से युक्त आठ विशेष मोबाइल कैंसर स्क्रीनिंग वैन भी संचालित की जा रही हैं। इन मोबाइल इकाइयों एवं आउटरीच शिविरों के माध्यम से दूरस्थ एवं चिकित्सा सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में अब तक 2,26,930 नागरिकों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
उन्नत उपचार की आवश्यकता वाले मरीजों को तृतीयक स्तर की चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने के लिए जिला कैंसर केयर यूनिट्स को प्रमुख क्षेत्रीय अस्पतालों से संबद्ध किया गया है। इनमें जयपुर स्थित एसएमएस मेडिकल कॉलेज का 270 बेड का स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, बीकानेर में 180 बेड की सुविधा तथा झालावाड़ में 20 बेड का विशेष कैंसर उपचार केंद्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जोधपुर, उदयपुर, अजमेर एवं कोटा सहित 12 मेडिकल कॉलेजों तथा दो जिला अस्पतालों में रेडियोथेरेपी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। मरीजों पर उपचार का आर्थिक भार कम करने के लिए मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना एवं मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
कैंसर संबंधी आंकड़ों के संकलन एवं निगरानी व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है। इसके तहत सितंबर 2026 तक 115 सरकारी एवं निजी अस्पतालों में संचालित केंद्रीकृत हॉस्पिटल बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री में 70 हजार से अधिक मरीजों का रेकार्ड दर्ज किया जा चुका है। राष्ट्रीय एनसीडी पोर्टल एवं आभा से जुड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड के माध्यम से डिजिटल निगरानी भी की जा रही है। इसके साथ ही सामाजिक भ्रांतियों एवं कैंसर से जुड़े संकोच को दूर करने तथा समय पर जांच एवं उपचार के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 'जीवनधारा' नामक विशेष पहल शुरू की गई है। इस पहल के अंतर्गत कैंसर से उबर चुके मरीजों की भागीदारी से उनकी 32 वास्तविक जीवन की प्रेरक कहानियों का संकलन किया गया है।
आगामी समय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग में तेजी लाने, जिलावार स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियों को दूर करने तथा स्क्रीनिंग में पॉजिटिव पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अंतिम उपचार तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
bhavtarini.com@gmail.com

