पीएचई में 16 करोड़ 42 लाख रुपए का घोटाला, 3 लोगों पर एफआईआर दर्ज, घोटालेबाजों ने अब तक 2 करोड़ 52 लाख लौटाए
भोपाल। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग (पीएचई) घोटाला मामले में क्राइम ब्रांच ने FIR दर्ज कर लिया है। क्राइम ब्रांच ने स्थापना प्रभारी हीरालाल, सहायक कम्यूटर ऑपरेटर सहित तीन लोगों को आरोपी बनाया है। सहायक कंप्यूटर ऑपरेटर राहुल आर्य को हरिद्वार से पकड़ा गया है। राहुल आर्य पांच साल से बिना नियुक्ति के काम कर रहा था। पीएचई में 16 करोड़ 42 लाख रुपए का घोटाला हुआ था। जांच शुरू होने के बाद घोटालेबाजों ने अब तक 2 करोड़ 52 लाख की राशि लौटाई है।
दरअसल ग्वालियर के पीएचई के अधीक्षण यंत्री वीके छारी ने 5 सदस्यों की टीम का गठन किया था। इसमें संभागीय लेखा अधिकारी राजेंद्र मीणा, वीरेंद्र सिंह पाल, आरसी मिश्रा, बृजेंद्र यादव को नामित किया था। मुख्य अभियंता आर एल एस मौर्य ने इस मामले में संधारण खंड क्रमांक एक में हुए घोटाले के बाद परिक्षेत्र के सभी कार्यपालन यंत्रियों को निर्देश जारी किए हैं कि वह अपने कार्यालय में पिछले 5 सालों में हुए भुगतान की जांच करें और इसका प्रतिवेदन भी उन्होंने तलब किया।
पता चला है कि वेतन और एरियर के नाम पर पीएचई के कार्यपालन यंत्री संधारण खंड क्रमांक 1 के दफ्तर में 16 करोड़ 42 लाख 13 हजार रुपए की गड़बड़ी हुई है। इसके लिए दफ्तर में पदस्थ स्टाफ ने कार्यालय के कर्मचारियों के खातों के नंबर को कई बार बदलकर अपात्र लोगों के खाते में मैप कर दिया और फिर भुगतान निकाल लिया। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि फर्जी भुगतान के बिलों को डीडीओ स्तर पर किस अधिकारी या कर्मचारी ने क्रिएट और एप्रूव किया था। यह रिपोर्ट कलेक्टर और वित्त विभाग को भी भेजी जानी है। पिछले 5 सालों के दौरान सरकारी धन का गलत इस्तेमाल की शिकायत खुद सरकार के वित्त विभाग ने अपने ऑडिट के दौरान पकड़ी थी।
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