प्रदेश बनेगा विश्वस्तरीय स्किल हब, कौशल विकास को उद्योगों से जोड़ने पर जोर, युवाओं के लिए नए अवसर होंगे तैयार : मुख्य सचिव
जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राजस्थान खनन, टेक्सटाइल एवं हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। इन क्षेत्रों में व्यापक संभावनाओं को देखते हुए युवाओं का कौशल संवर्धन कर उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश में कौशल विकास का मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है और इसी दिशा में राज्य सरकार भी निरंतर कार्यरत है।
मुख्य सचिव शुक्रवार को शासन सचिवालय में कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग एवं राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के अधिकारियों की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाए ताकि युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान किए जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा रहा है।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग संदीप वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार की बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत ₹450 करोड़ की लागत से विश्व स्तरीय स्किल हब स्थापित किया जाएगा तथा इसके लिए अप्रैल, 2026 के प्रथम सप्ताह में भोपाल एवं भुवनेश्वर स्थित केंद्रों का अध्ययन किया जाएगा। जयपुर एवं भरतपुर में अंतरराष्ट्रीय स्किलिंग एवं ओवरसीज प्लेसमेंट सेंटर स्थापित किए जाएंगे और 5-6 अन्य जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण युवाओं को समान अवसर प्राप्त हो सकें।
उन्होने बताया कि NSDC अकादमी के सहयोग से फ्यूचर स्किल्स सेंटर्स स्थापित किए जाएंगे, जिसके लिए महाविद्यालयों एवं 20-25 आईटीआई संस्थानों की सूची शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही RSLDC द्वारा NSDC के सहयोग से पर्यटन/हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में 7 हज़ार टूरिस्ट गाइड्स एवं ग्रीन एनर्जी सेक्टर में 25 हज़ार ‘सोलर दीदी’ के प्रशिक्षण कार्यक्रम अप्रैल 2026 से प्रारंभ किए जाने प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार स्किल इम्पैक्ट बॉंड के माध्यम से परिणाम-आधारित स्किलिंग को बढ़ावा देगी तथा इसके क्रियान्वयन हेतु मध्य प्रदेश के अनुभवों का अध्ययन कर अप्रैल 2026 में रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा।
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण कुमार पिल्लई ने भी निगम द्वारा प्रदेश में संचालित विभिन्न पहलों एवं कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास के लिए मौजूद संभावनाओं पर चर्चा की।
बैठक में शासन सचिव, श्रम विभाग पी.सी. किशन, आयुक्त कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग रिशव मंडल सहित विभागीय अधिकारी एवं राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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