मध्यान भोजन वितरण के लिए आई सामग्री को लेकर हुआ हंगामा
घुनी हुई दाल और बदबूदार तेल होने का कांग्रेस ने लगाया आरोप

Syed Javed Ali
मण्डला - जिले में चावल घोटाले के बाद स्कूली छात्रों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन में दी जाने वाली दाल और तेल के घटिया और गुणवत्ताहीन होने का मामला सामने आया है। मामला है बीआरसी कार्यालय का जंहा कांग्रेस ने मध्यान्ह भोजन में बच्चों को दी जानी वाली घटिया दाल और बदबूदार तेल उतरते पकड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों के मध्यान भोजन के लिए बटने आई दाल घुनी है और तेल से बदबू आ रही है। कांग्रेस के विरोध को देखते हुए सैंपलिंग के लिए खाद विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया। मामले पर जंहा जनपद शिक्षा अधिकारी ने प्रथम दृष्टया दाल, तेल के गुणवत्ताहीन होने और सेम्पलिंग की बात कह रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी इसे सप्लाई एजेंसी, जिले के अधिकारी और सरकार की मिलीभगत कर इसे संगठित लूट बता रहे हैं।
मंडला जिले के सर्व शिक्षा केंद्र सर्व शिक्षा अभियान के कार्यालय में खड़े ट्रक से प्राथमिक शाला के छात्र - छात्राओं को मध्यान भोजन में वितरित होने के लिए राहर की दाल और तेल आया है। कांग्रेस का आरोप है कि जब उन्होंने ट्रक से उतर रहे काटून को खुलवा तो उसमे घुनी हुई दाल और बदबूदार तेल निकला। फिर क्या था देखते ही देखते कांग्रेसी इसका विरोध करने एकत्रित होने लगे। इस मामले को लेकर क्षेत्रीय जनपद सदस्य, जनपद उपाध्यक्ष व जनपद स्थाई शिक्षा समिति के सभापति अभिनव चौरसिया ने बताया कि उन्हें जानकारी लगी कि यहां पर माल उतर रहा है तो वह माल की गुणवत्ता देखने आए। उसमें बताया गया कि इसमें ट्रक से बंद काटून उतर रहे है जिनमें दाल और तेल है। उन्होंने जब काटून खुलवाया तो उन्होंने देखा की दाल और तेल की गुणवत्ता ठीक नहीं है। दाल में घुन लगा हुआ था और तेल में भी बदबू आ रही है। एक्सपायर डेट भी नजदीक है। उन्होंने इसे संगठित लूट बताते हुई सप्लाई एजेंसी को प्रतिबंधित करने की मांग की।

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राकेश तिवारी ने इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मंडला में इसके पहले चावल घोटाला उजागर हो चूका है। उस चावल को केंद्रीय जाँच दल ने जानवरों के खाने लायक भी नहीं माना था और अब आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में एक और संगठित लूट और भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। उन्होंने सीधा प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोलते हुए कहा कि प्राथमिक शाला के छात्रों को वितरित करने के लिए आई दाल में घुन लगी है और तेल से बदबू आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रदेश के मुखिया अपने घर में इस सामग्री का सेवन करेंगे ? क्या वह अपने भांजे - भांजियों को इस तरीके का खाद्यान्न खाने देंगे। उन्होंने कहा कि इस आदिवासी जिले को भ्रष्टाचार की शरण स्थली बनाकर बच्चों के खाद्य सामग्री में इस तरह का भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
इस पूरे मामले पर मध्यान भोजन प्रभारी ऋषभ सिंह ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान जब मध्यान भोजन प्रभावित हुआ तो उस दौरान बच्चों को सूखा राशन वितरण होता था। अभी तक अगस्त तक के महीने में सूखा चावल प्राथमिक और माध्यमिक शाला के बच्चों को प्रदान कर दिया जाता था। अगस्त, सितंबर, अक्टूबर में दाल और तेल भी दिया गया। प्राथमिक शाला में 2 किलो दाल और माध्यमिक शाला में 3 किलो दाल का प्रावधान हुआ है। इसी तरह प्राथमिक और माध्यमिक शाला के छात्र छात्राओं के लिए तेल का भी प्रावधान किया गया है। यह प्राथमिक शाला के लिए माल आया है। इसमें एक काटून में 10 बच्चों की सामग्री है। यह बीआरसी के बाद संकुल स्तर पर स्कूलों को वितरित की जाएगी। उन्होंने कहा कि घटना सामने आने के बाद फ़ूड डिपार्टमेंट से दाल और तेल की सैंपलिंग कराई जा रही है। यदि दाल और तेल की गुणवत्ता मध्यान भोजन कार्यक्रम परिषद भोपाल के मानक से कम पाई जाती है तो नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।