नर्मदा किनारे सजेगी कला और साहित्य की महफ़िल
19 जुलाई से होगी 5 दिवसीय ‘रज़ा स्मृति’ की शुरुआत
Syed Javed Ali
मंडला - भारतीय कला के आधुनिक मूर्धन्य सैयद हैदर रज़ा की तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर कला, संगीत, नृत्य और कविता का वार्षिक उत्सव ‘रज़ा स्मृति’ मण्डला में मुख्यतः नर्मदा जी के किनारे रज़ा फ़ाउण्डेशन हिन्दी के वरिष्ठ कवि एवं रज़ा फ़ाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी अशोक वाजपेयी के निर्देशन में पुनः 19 से 23 जुलाई 2019 तक शहर में आयोजित कर रहा है। 19 जुलाई की सुबह 10 बजे रपटा घाट में ‘रज़ा स्मृति’ की शुरुआत मंडला सांसद व भारत सरकार के केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते व राज्य सभा सांसद श्रीमती सम्पतिया उइके की उपस्थिति में संभावित है। 5 दिवसीय ‘रज़ा स्मृति’ के दौरान राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा व पूर्व राज्य सभा सांसद और एनसीपी के जनरल सेक्रेटरी डी पी त्रिपाठी के भी उपस्थित होने की सम्भावना है। 23 जुलाई को हैदर रज़ा की तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर ‘रज़ा स्मृति’ में शामिल सभी कलाकारों व रज़ा के चाहने वालों के साथ - साथ मंडला कलेक्टर डॉ. जगदीश चंद्र जटिया कब्रिस्तान पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे।
रज़ा फ़ाउण्डेशन के सदस्य सचिव संजीव चौबे ने यहाँ रज़ा स्मृति के तैयारी के संबंध में अपनी एक दिवसीय यात्रा में बताया की 19 से 23 जुलाई तक अंचल के कलाकार आशीष कछवाहा, मनोज द्विवेदी, अशोक सोनवानी, भंगी लाल हरदहा, रामकुमार नंदा, शाकरा बेगम, दुर्गेशिनी भारतीया (बैगा), मनोज गोंडपाल, कपिल लखेरा, कुलदीप ठाकुर (सभी मण्डला) एवं प्रभात बरमिया बालाघाट, नवांशु रायपुर, कार्तिक त्रिपाठी वाराणसी, मनीषा वर्मा खैरागढ़, सुश्री चंचल साहू जमुल, सुश्री दीक्षा साहू बिलासपुर, ताकेश्वर सिन्ह, खैरागढ़, जयपाल अमरकंटक, सुश्री दिव्या सिंह नई दिल्ली की एक कला कार्यशाला खैरागढ़ के वरिष्ठ चित्रकार योगेन्द्र त्रिपाठी के संयोजन में, मण्डला के छात्रों के लिए एक क्ले वर्कशाप ‘मिट्टी के साथ’, ‘छाते पर रंग’ मण्डला के नागरिकों के लिए और ‘नर्मदा जी के किनारे’ 20 से 23 जुलाई तक नर्मदा-तट पर आयोजित है। उसमें 20 जुलाई को कविता पाठ से सांस्कृतिक संध्या नर्मदा जी के किनारे का शुभारंभ होगा। जिसमें वरिष्ठ हिन्दी कवि मलय जबलपुर अष्टभुजा शुक्ल बस्ती, सुश्री बाबूषा कोहली जबलपुर, सुश्री तेजी ग्रोवर भोपाल, महेश वर्मा अंबिकापुर से भाग लेंगे। 21 जुलाई को दलदली के लपटू सिंह बैगा का दल दशहरा, सैला, रीना और फाग आदिवासी नृत्य प्रस्तुत करेंगे। 22 जुलाई को सोनसाय बैगा दल (खटिया मण्डला) बैगा आदिवासी नृत्य प्रस्तुत करेगा और 23 जुलाई को डिंडोरी से अर्जुन धुरवे समूह बाघिन कर्मा नृत्य करेंगे।
रज़ा का मण्डला से गहरा लगाव था और वे अपने बचपन में वहाँ के जंगलों में देखे आदिवासी नृत्य हमेशा याद करते थे। वे नर्मदा नदी को भी बहुत आदर से हमेशा ’नर्मदा जी’कहकर ही बात करते थे। मण्डला में 1930 में उन्होंने पहली और आखि़री बार महात्मा गांधी को कुल 8 बरस की उर्म में देखा था। इस दर्शन का उन पर इतना प्रभाव पड़ा कि उनके परिवार के लगभग सभी सदस्य उनके भाई-बहन आदि बँटवारे के समय पाकिस्तान चले गये पर रज़ा नहीं गये थे क्योंकि उन्हें ऐसा जाना गांधी जी के साथ विश्वासघात होना लगा था। मण्डला के ककैया स्कूल में उनके अध्यापक नन्दलाल झरिया ने ही उन्हें बरामदे की एक दिवार पर एक बिन्दु बनाकर उस पर ध्यान केन्द्रित करने को कहा था। यह बिन्दु ही आगे जाकर रज़ा की कला का पेरिस में पहचान बना।
रज़ा फ़ाउण्डेशन के सदस्य सचिव संजीव चौबे ने उम्मीद जताई है कि पिछले वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी नगरवासी इस आयोजन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेंगे और कला के माध्यम से भारत और मण्डला का नाम विश्व पटल पर बढ़ाने वाले सैयद हैदर रज़ा साहब को कला के माध्यम से अपनी प्रणति देंगे।