एके-47 चुराने सीओडी का 'मैप' देखकर तोड़ी थी दीवार
जबलपुर
सेन्ट्रल आर्डनेंस डिपो (सीओडी) से एके-47 चुराने के लिए संस्थान का 'मैप' देखकर ही बाउंड्रीवॉल तोड़ी थी। तभी आरएसएसडी वर्कशॉप की बाउंड्रीवॉल के दूसरी तरफ डामर सड़क मिलती थी, जहां कार से जाकर पेड़ की आड़ में छुपाकर रखी एके-47 निकाल लेता था। पुलिस रिमांड में यह खुलासा आरोपित सुरेश ठाकुर (वर्कशॉप इंचार्ज) ने किया। इस बयान से पुलिस, सीओडी सिक्योरिटी, मिलिट्री इंटेलीजेंस अधिकारी परेशान हैं। पुलिस ने यह जानकारी नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) तक भेज दी है। इससे मामले में जांच करने एनआईए के जल्द शहर आने की संभावना है।
एके-47 चोरी व तस्करी मामले में पुलिस का कहना है कि सुरक्षा संस्थान सीओडी से वर्ष 2012-18 के बीच आरोपित सुरेश ने अज्ञात साथी की मदद से 100 के लगभग रायफलें चुराईं। सेना के उपयोग से बाहर की गईं एके-47 चुराने के बाद आरोपित सुरेश ने उन्हें दूसरे आरोपित पुरुषोत्तम रजक (ईएमई का सेवानिवृत्त आर्मरर) के हवाले कर दिया।
इन सभी एके-47 को आरोपित पुरुषोत्तम अपने पंचशील नगर स्थित घर ले गया। जहां पर एके-47 खोलकर मरम्मत व रंग-रोगन करके उन्हें एकदम नया जैसा बना दिया गया। इन एके-47 को आरोपित पुरुषोत्तम अपनी पत्नी चन्द्रवती रजक के साथ बिहार प्रांत के मुंगेर ले जाकर नक्सलियों, आतंकियों को एक-एक हथियार ढाई से 5 लाख रुपए लेकर बेच दिए। हथियार तस्करी करने में आरोपितों की शीलेन्द्र रजक ने मदद की।
सीओडी से 6 साल में 100 से ज्यादा एके-47 चोरी हुईं। सीओडी या पुलिस रिकॉर्ड में इनमें से एक भी चोरी दर्ज नहीं है। वजह सीओडी से रिजेक्ट एके-47 सेना या अन्य व्यक्ति के उपयोग करने लायक नहीं होना और उन्हें नष्ट करने के लिए सिर्फ जीआईएफ भेजना रही।
पुलिस 'कुछ' खोजने में नाकाम
सीओडी से एके-47 चोरी और बिहार में बेचने के मामले में जबलपुर पुलिस ने आरोपित पुरुषोत्तम, चन्द्रवती, शीलेन्द्र रजक और सुरेश ठाकुर के लिए गिरफ्तार करके लगातार पूछताछ की। इस मामले में पुलिस जांच करने के लिए आरोपितों के पंचशील नगर, अधारताल, सीओडी और बिहार तक गई, फिर भी वह कुछ खोजने में नाकाम रही। जबकि पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से करीब 20 लाख नकद, 8 लाख के जेवर और 10 लाख के वाहन जब्त किए।
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