कृषि उपज मंडी समिति के अधिकारियों पर रिश्वत लेकर अतिक्रमण को संरक्षण देने के आरोप
awdhesh dandotia
मुरैना। माधोपुरा, बालाजी पैलेस स्थित थोक सब्जी मंडी में कलेक्टर के निर्देश पर कुछ समय पूर्व बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। उस दौरान कृषि उपज मंडी समिति के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई थी कि भविष्य में मंडी परिसर में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाए तथा केवल पंजीकृत विक्रेताओं को ही व्यापार करने की अनुमति रहे।
लेकिन वर्तमान स्थिति इसके ठीक विपरीत दिखाई दे रही है। मंडी परिसर में एक बार फिर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा लिया है। कई अपंजीकृत दुकानदारों ने थोक सब्जी मंडी की जमीन पर स्थायी रूप से दुकानें संचालित करना शुरू कर दिया है। इससे न केवल मंडी की व्यवस्था प्रभावित हो रही है बल्कि शासन के आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना हो रही है।
जब अतिक्रमण कर दुकान संचालित कर रहे कुछ लोगों से बातचीत की गई और उन्हें कलेक्टर के निर्देशों का हवाला देते हुए अतिक्रमण हटाने की बात कही गई, तो उन्होंने दावा किया कि वे कृषि उपज मंडी समिति के कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रतिमाह राशि देते हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। अतिक्रमणकारियों का यह दावा मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कलेक्टर के निर्देशों के बाद अतिक्रमण पूरी तरह हटा दिया गया था, तो फिर दोबारा अवैध दुकानें कैसे खड़ी हो गईं? क्या मंडी समिति के जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं या फिर अवैध वसूली के कारण अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है?
अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यह पता लगाए कि आखिर किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत से मंडी परिसर में दोबारा अतिक्रमण पनपा है।
अतिक्रमणकारियों के दावों से घिरे मंडी अधिकारी
थोक सब्जी मंडी में दोबारा हुए अतिक्रमण के बाद कृषि उपज मंडी समिति के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि कलेक्टर के निर्देश पर अतिक्रमण हटाए जाने के बाद अपंजीकृत दुकानदारों ने फिर से मंडी परिसर में कब्जा कैसे कर लिया। अतिक्रमण कर दुकान संचालित कर रहे लोगों द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि वे हर माह मंडी समिति के कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राशि देते हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। यदि इन दावों में सच्चाई है तो यह न केवल मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, बल्कि शासन के आदेशों की भी खुली अवहेलना है। अब जिला प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका उजागर करे।
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