किसानों में साख और मजबूत करने के लिए जुटी मोदी सरकार, जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान

किसानों में साख और मजबूत करने के लिए जुटी मोदी सरकार, जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान

नई दिल्ली 
गांवों और किसानों में अपनी साख नए सिरे से मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार कुछ खास करने की दिशा में गंभीरतापूर्वक सोच रही है। इसके तहत 'यूनिवर्सल बेसिक इनकम' (UBI) और तेलंगाना के किसान मॉडल की संभावना पर विचार हो रहा है। केंद्र सरकार और बीजेपी को लगता है कि राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस जिस तरह किसानों से जुड़े मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठा रही है, उसका अगर मजबूती से जवाब नहीं दिया गया तो आम चुनाव में इसका प्रतिकूल असर हो सकता है। 

किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस आक्रामक 
बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और राज्यों में बीजेपी को सत्ता से रुखसत होना पड़ा। जाहिर है, कांग्रेस आगे भी किसानों के मुद्दों को आक्रमकता से उठाएगी। राहुल गांधी ने रविवार को पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह की जयंती 'किसान दिवस' के मौके पर इसका संकेत भी दे दिया। उन्होंने 'थैंक्यू फार्मर्स' हैशटैग के साथ ट्वीट किया, 'हमारे किसानों के आने वाले कल को सुरक्षित करने के लिए मैं वो हर कोशिश करने वाला हूं, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित बने। यह सिर्फ वादा नहीं है, कर्तव्य भी है मेरा। किसान दिवस के अवसर पर देश के किसानों को सलाम। आप हो तो हम हैं।' 

15 जनवरी के बाद मोदी सरकार कर सकती है बड़ा ऐलान 
सूत्रों के अनुसार 27 दिसंबर को पीएम नरेन्द्र मोदी 'यूबीआई' को लागू किए जाने के लिए अबतक की गई जमीनी काम की समीक्षा करेंगे। सरकार इसे देश के 10 करोड़ लोगों के बीच लागू करने की योजना पर काम कर रही है। 15 जनवरी के बाद ऐलान संभव है। इस स्कीम के तहत हर किसी को हर महीने एक खास राशि दी जाती है। सरकार शुरू में दो से ढाई हजार रुपये हर महीने देने की योजना पर काम कर रही है। राजस्थान विधानसभा में पहली बार बीजेपी ने घोषणापत्र में इस योजना को जगह दी थी। इससे पहले पिछले साल आर्थिक सर्वे में भी ‘यूबीआई’ की वकालत की गई थी और कहा गया था कि गरीबों के लिए यह बेहतर योजना साबित हो सकती है। 

कई देशों में पहले से लागू है UBI स्कीम 
मोदी सरकार पहले साल इस योजना में लगभग 10 हजार करोड़ खर्च करने का रास्ता तलाश रही है। हालांकि ‘यूबीआई’ के बारे में पिछले कुछ दिनों पूरे दुनियाभर में एक बहस फैली हुई है। पूरे विश्व में फिनलैंड पहला ऐसा देश बना, जहां इस स्कीम को पूरी तरह लागू किया गया था जिसके बाद लगभग दो दर्जन देशों में इस योजना को लागू किया गया था। 

2016 में इंदौर के एक गांव में लागू हुआ था पायलट प्रॉजेक्ट 
सरकार ने 'यूबीआई' को लागू करने से पहले 2016 में मध्य प्रदेश में एक पंचायत में पॉयलट प्रॉजेक्ट पर काम किया था। इंदौर के एक गांव में 6,000 लोगों को 5 साल तक हर महीने वेतन दिया गया। इसके तहत वयस्क को 500 रुपये और बच्चे को हर महीने 150 रुपये मिले। हालांकि, केंद्र सरकार ने किसानों के लिए तेलंगाना मॉडल को भी गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय अधिकारियों की एक हाई लेवल टीम तेलंगाना से लौट कर आई है और उसने पीएमओ को इस बारे में एक रिपोर्ट भी सौंपी है। बीजेपी शासित झारखंड ने भी तेलंगाना जैसी ही योजना लागू कर दी है। 

इस तरह काम करती है यूबीआई 

  • देश के हर व्यक्ति का अपना एक नंबर होता है। देश में इसे आधार नंबर से जोड़ा जाएगा। 
  • उस व्यक्ति का अपना एक अकाउंट होगा। हर महीने उस अकाउंट में तय राशि आएगी। 
  • इस स्कीम के तहत पैसा देने के बाद सब्सिडी सिस्टम खत्म कर दिया जाता है। 

यह है तेलंगाना की किसान स्कीम 
कर्ज में डूबे किसानों को राहत देने के लिए तेलंगाना की टीआरएस सरकार ने इस साल के शुरू में एक योजना लागू की। इसके तहत सभी किसानों को हर फसल सीजन से पहले 4 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है, यानी साल में 8 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलती है। खेती के लिए मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया जाता है।