गणेश जी से सीखें गंभीरता और विवेकशीलता
बड़वानी
गणेशजी का गज मस्तिष्क बुद्धिमत्ता का परिचायक है। सामान्यतः हाथी धीर, गंभीर और शांतचित्त होता है। उनकी आंखें छोटी हैं, जिसके कारण मन के भाव अन्य व्यक्ति नहीं पढ़ सकता है। बड़े कान अधिक से अधिक सुनने की प्रवृत्ति के द्योतक हैं। हाथी बिना झुके अपनी सूँड की सहायता से कोई भी वस्तु उठा सकता है साथ ही वह परम शक्तिवान भी होता है। प्रत्येक व्यक्ति एवं विद्यार्थी को भी विवेकशील, गंभीर, मन के भावों को प्रकट न होने देने वाला, अच्छी बातों पर ध्यान देने वाला, स्वाभिमानी और शक्तिशाली होना चाहिए। गणेश जी को मोदक बहुत पसंद है, जो सात्विक आहार होकर बुद्धि को स्थिर बनाता है।
उनका बड़ा उदर पाचन क्षमता को दर्शाता है एक व्यक्ति को भी सभी रहस्य पचाकर रखने में क्षमतावान होना चाहिए। उनकी चार भुजाएं चार पुरुषार्थों की प्रतीक हैं। वाहन चूहे को छोटे से छोटे प्राणी को महत्व देने की प्रवृत्ति के रूप में देखा जा सकता है। ये बातें शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा आज गणेशजी के व्यक्तित्व से युवाओं के लिए शिक्षा कार्यक्रम में कार्यकर्ता पवन परिहार और डॉ. मधुसूदन चौबे ने विद्यार्थियों को बताई। यह आयोजन प्राचार्य डॉ. एनएल गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया।
डॉ. चौबे ने बताया कि सार्वजनिक तौर पर गणेशोत्सव की शुरुआत बाल गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र में की थी। इसका उद्देश्य अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम में जनसहभागिता बढ़ाना था। कार्यकर्ता पवन परिहार ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि गणेशजी की मिट्टी की प्रतिमा की स्थापना करें ताकि विसर्जन के अवसर पर जल में प्रतिमा का पूर्णतः विलय हो जाये।
कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने बताया कि 13 सितम्बर को गणेश चतुर्थी है। 23 सितम्बर को अनंत चतुर्दशी है। इस दौरान कॅरियर सेल के द्वारा विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया जाएगा कि किस तरह तिलकजी द्वारा शुरु किये गये गणेशोत्सव ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। साथ ही रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा।
संचालन राहुल मालवीया ने किया। आभार भारती धार्वे ने व्यक्त किया। सहयोग आवेश खान, कृष्णकांत धार्वे, ग्यानारायण शर्मा, संजय सोलंकी, शुभम सेन ने किया।
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