ब्याज दर में लगातार चौथी राहत देने को तैयार आरबीआई, 0.25 फीसदी कटौती की गुंजाइश

ब्याज दर में लगातार चौथी राहत देने को तैयार आरबीआई, 0.25 फीसदी कटौती की गुंजाइश

मुंबई    
रिजर्व बैंक लगातार चौथी बार ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर राहत दे सकता है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को इसके स्पष्ट संकेत दिए। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति सात अगस्त को रेपो दर पर फैसला करेगी। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक ब्याज दर में 0.75 फीसदी कटौती के साथ अपने रुख को तटस्थ से नरम कर चुका है। नरम रुख का ही मतलब है कि रेपो दर में कम से कम 0.25 फीसदी कटौती की गुंजाइश है।

हालांकि बाजार ऑटो, रियल एस्टेट और अन्य सेक्टरों की हालत देखते हुए कम से कम 0.50 फीसदी कटौती की उम्मीद कर रहा है। वर्ष 2013 के बाद यह पहला मौका है कि जब केंद्रीय बैंक लगातार तीन बार ब्याज दर को नीचे लाया है, हालांकि चौथी बार कटौती हुई तो नया रिकॉर्ड बनेगा। दास ने कहा कि महंगाई हमारे लिए मुख्य पैमाना है और आर्थिक विकास दर में सुस्ती के तथ्य को भी हमें देखना है, लेकिन इसे पटरी पर लाने के लिए सभी को अपनी भूमिका निभानी है। उद्योगों को किफायती दर पर कर्ज मुहैया कराने पर रिजर्व बैंक का ध्यान रहेगा।

विशेषज्ञों ने कहा है कि सरकार अपने स्तर पर राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 3.3 से बढ़ाकर 3.4 फीसदी पर ला चुकी है और उसने बजट में किसी भी सेक्टर के लिए प्रोत्साहन पैकेज का ऐलान नहीं किया है। ऐसे में रिजर्व बैंक से उम्मीद बढ़ गई है।

दास ने कहा कि हमें ध्यान में रखना होगा कि बैंक संकट की स्थिति से गुजर रहे हैं और अब उन्होंने उबरना शुरू कर दिया है। बैंकों पर ब्याज दर में राहत को ग्राहकों तक पहुंचाने का दारोमदार है। रेपो दर में भले ही 0.75 फीसदी की कटौती हो गई है, लेकिन एसबीआई समेत अन्य बैंकों ने ब्याज दरों में महज 0.15 से 0.20 फीसदी तक ही कटौती की है, जो एक तिहाई भी नहीं है। ऐसे में ग्राहकों को होम लोन, ऑटो लोन या अन्य प्रकार के कर्ज में बड़ी राहत नहीं मिली है।

दास ने कहा कि बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपये की पूंजी मुहैया कराना अच्छा कदम है। ऐसे में यह देखना होगा कि इस मदद से बैंकों की स्थिति में क्या सुधार आता है और उसको देखते हुए बैंकों के निजीकरण के मुद्दे पर बाद में विचार हो सकता है। उन्होंने बैंकों के विलय एवं पुनर्गठन को बेहतर बताया।

आईएलएफएस, डीएचएफएल के संकट पर दास ने कहा कि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की स्थिति पर आरबीआई नजर रखे हुए हैं। इसको लेकर बैंकों से भी चर्चा की गई है। हमारी कोशिश है कि एक और एनबीएफसी न डूबे, खासकर कोई बड़ी कंपनी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एनबीएफसी की मदद के लिए विशेष विकल्प नहीं किया जाएगा।