प्रतिबंध के बाद भी सरकारी शिक्षक पढ़ा रहे धड़ल्ले से ट्यूशन,नहीं हो रही कोई कार्रवाई

प्रतिबंध के बाद भी सरकारी शिक्षक पढ़ा रहे धड़ल्ले से ट्यूशन,नहीं हो रही कोई कार्रवाई

चन्देरी
नगर में शिक्षा विभाग से संबंधित सरकारी स्कूलों के शिक्षक बेखौफ होकर विभागीय मापदंडों को तिलांजलि देकर स्कूल टाइम के बाद ट्यूशन पढ़ाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। ट्यूशन पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद कुछ सरकारी शिक्षकों द्वारा ट्यूशन रूपी गैर-कानूनी कृत्य को अंजाम दिया जा रहा है। क्षेत्र के नगर के बुद्धिजीवियों का कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर ट्यूशन पढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है लेकिन प्रतिबंध के बावजूद कुछ सरकारी स्कूलों के अध्यापकों द्वारा अवैध घोषित किए गए इस धंधे को बेखौफ अंजाम दिया जा रहा है।

सरकारी अध्यापकों की प्राइवेट कोचिंग, विभागीय जिम्मेदारों प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लोगों ने विभाग की अफसरशाही पर कमजोर पकड़ व कार्य प्रणाली पर आरोप जड़ते हुए कहा है कि नगर के गली मोहल्लों में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का अवैध कारोबार किया जा रहा है लेकिन विभाग को कानोंकान खबर तक नहीं है। बुद्धिजीवी वर्ग ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा है कि सरकार स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की एवज में अध्यापक वर्ग को माहवार मोटी रकम वेतन के रूप में देकर भरपाई कर रही है। बावजूद इसके अध्यापकों द्वारा ट्यूशन के धंधे को अंजाम दिया जा रहा है। सरकारी शिक्षकों की कार्यप्रणाली को देखकर स्पष्ट होता है कि सरकार द्वारा दी जा रही 30 से 50 हजार रुपए तक के वेतन से उनका गुजारा नहीं हो रहा है या ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं जिससे कि विद्यार्थियों को विद्यालयों में उचित अध्ययन नहीं मिल रहा है। जिससे कि विद्यार्थी विद्यालयों की पढ़ाई छोड़कर एक डेढ़ घंटे की प्राइवेट कोचिंग लगवाने को मजबूर हैं।

बजह कुछ भी हो लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों के अध्यापकों द्वारा स्कूल टाइम के बाद व पहले बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का अवैध कारोबार विगत लंबे अंतराल से चल रहा है। लेकिन आज तक ऐसा उदाहरण सुनने व देखने को नहीं मिला है कि कहीं पर विभाग द्वारा इस गैर-कानूनी गोरखधंधे को अंजाम देने वाले शिक्षकों के खिलाफ कभी कठोर कार्रवाई अमल में लाई गई हो।