जयपुर शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए 15वें वित्त आयोग से मिले 344.70 करोड़ रुपये, वायु गुणवत्ता में होगा उल्लेखनीय सुधार
जयपुर। पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा ने विधानसभा में कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, ई-वाहनों को बढ़ावा देने तथा हरित विकास कार्यों से जयपुर की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक गुरवीर सिंह के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी देश में ई-व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए पूर्ण प्रयासरत हैं। देश धीरे-धीरे पेट्रो ईंधन आधारित वाहनों से ई-वाहनों की दिशा में अग्रसर हो रहा है। ई-व्हीकल्स के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण की समस्या पर लगाम लगेगी। शर्मा ने बताया कि जयपुर शहर में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत 21.7 वर्ग किमी भूमि पर पौधारोपण कर हरित पट्टी का विकास किया है।
इससे पहले मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में पर्यावरण राज्य मंत्री ने पिछले पांच साल में जयपुर की वायु गुणवत्ता सूचकांक की औसत स्थिति का वर्षवार विवरण तथा प्रदूषण श्रेणियों गुड, सेटिस्फेक्टरी, मोडरेट, पुअर, वेरी पुअर और सीवियर का ब्यौरा सदन में प्रस्तुत किया। उन्होंने जयपुर शहर में स्थापित 6 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केन्द्र से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पीएम 2.5, पीएम 10 तथा अन्य प्रदूषकों के वार्षिक औसत स्तर के वर्षवार विवरण की जानकारी भी सदन को दी।
राज्यमंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान के लिए आईआईटी, कानपुर ने स्रोत निर्धारण अध्ययन किया है। इस अध्ययन के अनुसार जयपुर में प्रदूषण के मुख्य स्रोतों में सड़क एवं भवन निर्माण के समय फैलने वाली धूल, वाहन व औद्योगिक उत्सर्जन, ठोस अपशिष्ट का दहन तथा डीजल जनरेटर सेटों का उपयोग शामिल है। इन स्रोतों से उत्पन्न प्रदूषण के नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत अल्पकालिक एवं तात्कालिक कार्यवाही की गई हैं। जयपुर में वायु प्रदूषण की स्थाई रोकथाम के लिए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के अंतर्गत नगर कार्य योजना तैयार की गई है। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु परिवहन , शहरी विकास, उद्योग व पुलिस विभाग तथा राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, नगर निकायों की भूमिका और उत्तरदायित्व निर्धारित किए गए हैं।
राज्यमंत्री ने बताया कि एनसीएपी के अंतर्गत आधार वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्ष 2025-26 तक पीएम 10 की सांद्रता में 40 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 15वें वित्त आयोग के माध्यम से जयपुर नगर निगम को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। वायु गुणवत्ता सुधार हेतु जयपुर को अब तक 344.70 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है।
इस राशि से सड़कों की धूल नियंत्रण हेतु पुनर्निर्माण एवं सुधार कार्य, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से उत्पन्न प्रदूषण की रोकथाम, जैव-ईंधन जलाने से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण, जन-जागरूकता के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों सहित विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं।
राज्यमंत्री ने बजटीय प्रावधानों के संबंध में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राज्य सरकार एवं संबंधित नगरीय निकायों के मध्य हुए एमओयू की जानकारी भी सदन को दी।
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