57 साल बाद मुंबई में होगा विधानसभा का शीतकालीन सत्र
मुंबई।
राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र 19 नवंबर से मुंबई में शुरू होने जा रहा है। दो हफ्तों तक चलने वाले इस सत्र की घोषणा गुरुवार को की गई थी। विपक्ष ने सत्र की "छोटी अवधि" के लिए सरकार की निंदा की है। हालांकि, यह शीतकालीन सत्र अद्वितीय होगा क्योंकि यह 57 साल बाद नागपुर की बजाय मुंबई में आयोजित किया जाएगा।
बताते चलें कि आमतौर पर राज्य विधानसभा का मानसून और बजट सत्र मुंबई में आयोजित किए जाता है, जबकि शीतकालीन सत्र नागपुर में आयोजित होता है। साल 1961 के बाद पहली बार शीतकालीन सत्र का आयोजन इस बार मुंबई में किया जाएगा। मानसून सत्र का आयोजन 47 वर्षों बाद नागपुर में आयोजित किया गया था।
1953 के नागपुर समझौते के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य के निर्माण हुआ था और इसमें नागपुर को दूसरी राजधानी का दर्जा दिया गया था। तब यह फैसला किया गया कि विधायिका के सत्रों में से एक नागपुर में आयोजित किया जाएगा। हालांकि, समझौते ने यह नहीं कहा गया था कि नागपुर में कौन सा सत्र आयोजित किया जाएगा। विधायिका के अधिकारी ने कहा कि यह फैसला बाद में किया गया था कि यहां शीतकालीन सत्र आयोजित किया जाएगा।
मानसून सत्र के अंत में घोषित किया गया कि शीत कालीन सत्र 19 नवंबर को शुरू होकर 30 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान महज 8 कार्य दिवस ही मिलेंगे क्योंकि ईद और गुरुणानाक जयंती को दो सार्वजनिक अवकाश होंगे।
एक हफ्ते कार्यकाल बढ़ाने की मांग
एक अधिकारी ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी ने दोनों सदनों की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में मांग की थी कि सत्र का समय एक हफ्ते बढ़ाया जाए। हालांकि, सरकार ने मांग को खारिज कर दिया। पारंपरिक रूप से शीतकालीन सत्र दो सप्ताह का होता है।
विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने कहा कि सत्र का विस्तार करने से इंकार करके भाजपा की अगुआई वाली सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस से भाग रही है। राज्य में सूखे की स्थिति खतरनाक है और सरकार इससे निपटने के लिए आकस्मिक योजना के साथ तैयार नहीं है।
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