पात्र किसानों को समयबद्ध रूप से मिल रहा तारबंदी अनुदान: कृषि मंत्री
जयपुर। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि विधानसभा क्षेत्र सागवाड़ा में बड़ी संख्या में तारबंदी की पत्रावलियां निरस्त हुई हैं, जिसका मुख्य कारण मौके पर बताए गए खसरा का क्षेत्रफल कम होना, खसरा नंबर एक परिधि में न होना, सत्यापन से पूर्व तारबंदी का पाया जाना, आवेदक कृषक की मृत्यु हो जाना, किसानों का विभागीय निर्देशों पर तारबंदी पर सहमत न होना, किसानों में आपसी तालमेल न होना, व मापदंडों पर खरा न उतरने पर तारबंदी की पत्रावलियां निरस्त हो जाती है। साथ ही खेतों में फसल खड़ी होने के कारण इस वित्तीय वर्ष में तारबंदी करवाया जाना संभव नहीं हुआ।
मीणा, सदस्य शंकरलाल डेचा के पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा तारबंदी की योजना का लक्ष्य मूल रूप से जंगली सूअर व नीलगायों से फसलों को बचाना है। जिसमें डेढ़ फीट की दीवार के ऊपर तारबंदी की जाती है। जिलों को वित्तीय वर्ष के आरम्भ में आबादी एवं उपलब्ध पत्रावलियों के अनुसार लक्ष्य आवंटित किए जाते हैं, जिसमें "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर फाइलों का निस्तारण किया जाता है। यदि किसी जिले में लक्ष्य से अधिक पत्रावलियां प्राप्त हो जाती है, तो अन्यत्र स्थान से अतिरिक्त लक्ष्य का आवंटन कर दिया जाता है। वित्तीय वर्ष समाप्ति पर आवेदक पत्रावलियों को अग्रेषित कर पात्र कृषकों की पत्रावलियों का आगामी वर्ष में निस्तारण कर दिया जाता है।
मीणा ने सदस्य शंकरलाल डेचा के मूल प्रश्न का लिखित जवाब देते हुए विधान सभा क्षेत्र सागवाड़ा में विगत दो वर्षों में कृषि उपकरण, पाईप लाईन व तारबंदी हेतु किसानों द्वारा किए गए आवेदनों व अनुदान स्वीकृति का वर्षवार संख्यात्मक विवरण सदन के पटल पर रखा।
मीणा ने बताया कि वर्तमान में सरकार तारबंदी के लिए देय अनुदान में वृद्धि का कोई विचार नहीं रखती है। उन्होंने मूल प्रश्न का जवाब देते हुए बताया कि वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा में सामुदायिक आधार पर 10 या 10 से अधिक कृषकों के स्थान पर समूह में न्यूनतम कृषकों की संख्या 07 कर दी गयी।
उन्होंने कहा केन्द्रीय प्रवर्तित योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-तिलहन के अंतर्गत वर्ष 2017-18 से प्रारम्भ किए गए तारबंदी कार्यक्रम में कृषकों को 400 रंनिग मीटर तक तारबन्दी स्थापित करने पर ईकाई लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रूपये 40 हजार दिए जाने का प्रावधान था। वर्ष 2022-23 से लघु व सीमांत कृषकों को ईकाई लागत का 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान राज्य योजना से उपलब्ध करवाये जाने का प्रावधान किया गया एवं 2023-24 में सामुदायिक आधार पर 10 या 10 से अधिक कृषकों के समूह में न्यूनतम 5 हैक्टेयर में तारबंदी किए जाने पर प्रति कृषक अनुदान राशि ईकाई लागत का 50 प्रतिशत से बढाकर 70 प्रतिशत या अधिकतम 56 हजार रूपये किए जाने का प्रावधान किया गया है।
वर्ष 2025-26 में वनाधिकार पट्टा धारक कृषकों को 400 रनिंग मीटर तक तारबंदी स्थापित करने पर ईकाई लागत का 90 प्रतिशत या अधिकतम राशि 72 हजार रूपये, जो भी कम हो अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
तारबंदी कार्यक्रम में कृषकों के तारबंदी व्यय पर लागत कम करने की दृष्टि से मापदण्डों में आंशिक संशोधन करते हुए पिलर्स की दूरी 10 फीट के स्थान पर अधिकतम 15 फीट, 6 होरिजोन्टल एवं 2 डायगोनल वायर के स्थान पर 5 होरिजोन्टल व 2 डायगोनल तार लगाने का प्रावधान किया गया। साथ ही प्रत्येक 10 वें पिलर पर अतिरिक्त पिलर से सपोर्ट को 15 वें पिलर पर किए जाने का भी प्रावधान किया गया है, साथ ही प्रीकास्ट सीमेन्ट क्रंकीट पिलर/पत्थर की पट्टियों के लिए फाउण्डेशन की अनिवार्यता समाप्त की है।
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