कलियुग में परेशान व्यक्ति को राम कथा का सहारा लेना चाहिए: पंडित सुरेन्द्र जी

कलियुग में परेशान व्यक्ति को राम कथा का सहारा लेना चाहिए:  पंडित सुरेन्द्र जी

भोपाल। राम रस अमृत है। भक्‍त लोग इसका रसपान करते हैं , यानि कि इसे जीवन में उतारते हैं। राम की महिमा का प्रभाव है कि जो भी भ्‍क्‍त इस कथा को सुनता है उसके जीवन के सभी संशय मिट जाते हैं। जरूरत है तो यह कि आप अपने जीवन में इस कथा को आधार बनाकर जीने की आदत डालें। कथा का जितना भी बखान,गुणगान किया जाए उतना कम है। वेद और शास्‍त्र भी जिसकी महिमा गाते -गाते नहीं अघाते वो हैं दशरथ नंदन भगवान राम। भगवान राम जब वन को चले गए तो यह सुनकर भरत को घोर संताप हुआ। वे अपने अग्रज और अयोध्‍यापति राम से मिलने भरत जी स्‍वयम जा रहे हैं। वे विरह की व्‍यथा को भारदवाज जी से कहते हैं। दूसरी ओर भगवान राम हैं कि वो खुद ही भरत के मन की बात जानकर चिंतित हैं और समाधान खोज रहे हैं। सच कहूं तो राम और भरत की कथा परिवार , जीवन के मर्म की कथा है। इसको समझने के लिए बहुत उदार मन चाहिए। क्‍योंकि आज के जमाने में लोग संपत्ति बांट रहे हैं , मैं तो कहता हूं कि बांटना ही है तो भाई की विपत्ति बांटो। ऐसा करने से मन को शांति मिलेगी। मैं आप सबसे कहूं कि जीवन में शांति ही सुख का आधार है। इसलिए मानस में वर्णित कथाओं के मर्म को समझते हुए उसको जीवन में उतारना चाहिए। राम और भरत के प्रसंग पर चिंतन करते हुए महाराज श्री कथामर्मज्ञ श्री पं सुरेंद्र चतुर्वेदी जी ने कहा कि- आज कलियुग में कोई भी व्‍यक्ति यदि परेशान है तो उसे राम कथा का सहारा लेना चाहिए। 
 श्रावण्‍ मास के इस दूसरे पक्ष में पं चतुर्वेदी ने लोगों से कथा श्रवण्‍ करने और मन को भक्ति के सहारे लगाने की अपील की।ज्ञात हो कि पं चतुर्वेदी जी दारा संगीतमय राम कथा का श्रवण्‍ कथा रसिकों को प्रतिदिन कराया जा रहा है।कथा का विश्राम शुक्रवार को होगा।

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