मंत्रीमंडल गठन में कोरोना के कारण हो सकती है देर
भोपाल। एक माह के इंतजार के बाद भले ही सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एक छोटा सा मंत्रीमंडल का गठन कर दिया है किंतु बाद के विस्तार के लिए अभी कोई तारीख भी निश्चित नहीं है। ऐसे में संभव है कि मंत्रीमंडल की आस लगाए भाजपा के दिग्गजों का इंतजार काफी लंबा हो सकता है। हालांकि शिवराज ने अपने एक बयान में यह कहा जरूर है कि वे शीघ्र ही इसका विस्तार करेंगे।

राज्य की सियासत में कोरोना का संक्रमण भी एक बड़ा कारण है। इसके कारण ही शिक्षा व्यवस्था से लेकर शासकीय और सामाजिक गतिबिधियां ठप पड़ी हैं। ऐसे में यहा सोचना कि शीघ्र ही मंत्रीमंडल का विस्तार हो सकता है , बेमानी होगी। पार्टी के आंतरिक रणनीतिकार और सियासत के जानकारों की मानें तो कोरोना का संकट अभी फिलहाल टलने वाला नहीं है। ऐसे में कोरोना के बहाने मंत्रीमंडल का विस्तार टालना समय की मांग हो सकती है। दरअसल राज्य में भाजपा के हालात उतने आसान नहीं जितने कि दिख रहे हैं। इसमें सिंधिया गुट का आना और उन्हें अब पार्टी में समाहित करना पार्टी के दिग्गजों के लिए बड़ी मुश्किलों की राह बनती जा रही है।
इन दिग्गजों को है इंतजार :
भाजपा में यदि वरिष्ठता क्रम पर गौर करें तो सबसे वरिष्ठ आठ बार के विजयी गोपाल भार्गव हैं। इसके अलावा नागेंद्र सिंह, राजेदं्र शुक्ल, केदार नाथ शुक्ल, गिरीश गौतम,विजय शाह , सीतासरण शर्मा आदि ऐसे तमाम विधायक हैं जो अनेक बार से जीत दर्ज कराते आए हैं। इसके अलावा आंकड़े बताते हैं कि पार्टी में सात बार के तीन, छह बार के पांच, पांच बार के आठ, चार बार के ग्यारह , तीन बार के तेईस ,दो बार के अटÞठाईस और पहली बार के उन्तीस विधायक चुनकर आए हैं। ऐसे में मंत्रीमंडल में किसे मौका मिलेगा यह समय बताएगा।
भार्गव को विधान सभा अध्यक्ष बनाने की चर्चा :
सीएम शिवराज के मंत्रीमंडल गठन में सबसे वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव को जगह ना देना काफी चर्चाओं में रहा। यह भी तर्क दिया गया कि सभी वर्ग और क्षेत्र को ध्यान
में रखते हुए बुदेलखंड से एक ही मंत्री बनाया जाना था। ऐसे में भार्गव रह गए। अब चर्चा का बाजार इस बात को लेकर गर्म है कि उन्हें विधान सभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। ऐसे में भाजपा को कितना फायदा होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
सिंधिया गुट के शेष नेताओं को लेकर मंथन :
गौर करने वाली बात यह है कि सिंधिया के एक इशारे पर कांग्रेस का दामन छोड़कर आने वाले सभी 22 विधायकों को लेकर भाजपा में नए सिरे से मंथन चल रहा है। सोशल मीडिया पर तो यह भी खबर चली कि सभी को टिकिट नहीं दिया जा सकता। ऐसे में आने वाले छह माह में ये दिग्गज क्या करेंगे? सिंधिया गुट से केवल दो को अभी तक मौका मिला है जिसमें गोविंद सिंह, तुलसी सिलावट हैं। बाकी के प्रद्युम्न सिंह,इमरती देवी,महेंद्र सिंह सिसोदिया तथा प्रभुराम चौधरी का क्या होगा? इसी क्रम में वरिष्ठ नेता विसाहूलाल सिंह आदि भी कतार में हैं। ऐसे में भाजपा के िलए चुनौती कठिन दिख रही है।
कांग्रेस ने कसा है तंज :
भाजपा सरकार में कांग्रेस से मंत्री पद छोड़कर आए दिग्गजों को मनचाहा पद ना मिलने को लेकर कांग्रेस ने तंज कसा है। कांग्रेस ने डिप्टी सीएम और राजपूत को लेकर जबरदस्त तंज कसते हुए कहा ऐसा होता पहली बार दिख रहा है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी आड़े हाथों लिया है। ऐसे में देखना यह दिलचस्प हो गया है कि कांग्रेस आने वाले कितना और हमलावर होती है। उधर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा कह चुके हैं कि आने वाले दिनों में उपचुनाव में कांग्रेस को शत प्रतिशत जीत मिलेगी। इसके बाद एक बार फिर राज्य में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो सकती है।