21 जिलों में सिवनी का पायलेट प्रोजेक्ट के लिए चायन
भोपाल। मध्य प्रदेश में पायलेट प्रोजेक्ट के लिए सिवनी का चयन हुआ है। पूर्व क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के 21 जिलों में सिवनी जिले का चयन होने के बाद बिजली अधिकारियों ने काम पूरा कर लिया है। इस माह से प्रोजेक्ट के तहत कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
प्रोजेक्ट को प्रदेश में लागू किया जाएगा
जिले में काम ठीक रहा तो इस प्रोजेक्ट को प्रदेश में लागू किया जाएगा। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) परियोजना के अंतर्गत बिजली उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी की राशि सीधे उन्ही के खातों में जाएगी। इसके बाद यह राशि बिजली विभाग को ट्रांसफर होगी। इससे सब्सिडी की राशि में गड़बड़ी नहीं होगी।
साथ ही उपभोक्ताओं को पता चलेगा कि सरकार से उन्हें कितनी सब्सिडी मिल रही है। अब तक सब्सिडी की राशि सीधे बिजली विभाग को मिलती थी। अधिकारियों के मुताबिक एक एचपी पर किसान को 1000 रुपए का भुगतान करना होता है, लेकिन सब्सिडी के तहत किसान से सिर्फ 53 रुपए लिए जाते हैं। शेष राशि सरकार सब्सिडी के रूप में देती है।
52 हजार कनेक्शनधारी का डाटा तैयार
सिवनी जिले में 52 हजार स्थाई कनेक्शनधारी बिजली उपभोक्ता (किसान) का डाटा अधिकारियों ने तैयार कर लिया है। इस उपभोक्ताओं के आधार कार्ड, मोबाइल नंबर के अलावा उनके बैंक खाता का अकाउंट नंबर लिंक कर दिए गए है। इसके आधार पर इन उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी की राशि ट्रांसफर होगी। इस माह से सब्सिडी की राशि ट्रांसफर होने का काम शुरू हो जाएगा।
उपभोक्ताओं को राशि दिखेगी
सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की राशि बिजली उपभोक्ताओं को बैंक खाते में दिखेगी जरूर, लेकिन वे इसे निकालकर खर्च नहीं कर सकेंगे। उपभोक्ताओं के खाते में आने के बाद सब्सिडी की यह राशि बिजली विभाग को मिलेगी। बिजली अधिकारियों ने बताया है कि पायलेट प्रोजेक्ट के तहत जुलाई माह से डाटा तैयार करने का काम शुरू किया गया था।
मध्य क्षेत्र में विदिशा व पश्चिम क्षेत्र में झाबुआ का चयन
प्रदेश के पूर्व क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी में जहां सिवनी जिले का चयन हुआ है। वहीं मध्य क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी में विदिशा व पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी में झाबुआ का चयन हुआ है। इन जिलों में भी पायलेट प्रोजेक्ट के तहत काम किया जा रहा है।
इनका कहना है
पूर्व क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के 21 जिलों में से सिवनी जिले का चयन पायलेट प्रोजेक्ट के लिए हुआ है। इसके तहत उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी की राशि उनके बैंक अकाउंट में जाएगी। इसके बाद यह राशि कंपनी को मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं को पता चलेगा कि उन्हें सरकार से कितनी सब्सिडी मिल रही है।
- पीके मिश्रा, अधीक्षण यंत्री, सिवनी