उप्र में वन डिस्ट्रिक्ट वन डेस्टिनेशन आधार पर बढ़ेगा ईको टूरिज्म

उप्र में वन डिस्ट्रिक्ट वन डेस्टिनेशन आधार पर बढ़ेगा ईको टूरिज्म
लखनऊ, योगी सरकार प्रदेश में एक जिला एक गंतव्य (वन डिस्ट्रिक्ट वन डेस्टिनेशन) के आधार पर भी ईको टूरिज्म को विकसित करने जा रही है।  वन्यजीव विहार के साथ जैव विविधता वाले स्थलों इन स्थलों में मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सूबे में ईको टूरिज्म बढ़े और उसके माध्यम से रोजगार व आमदनी के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी नई इबारत लिखी जा सके।

खेती-किसानी और गांव की महत्वपूर्ण खबरों के लिए क्लिक करें लिंक...

जागत गांव डाट काम

जिस जिले की जो भी जैव उत्पाद होंगी उसे चिन्हित कर एक जिला एक जैव उत्पाद के रूप में भी चिन्हित किया जा रहा है। मसलन सीतापुर में प्लाईवुड, बहराइच एवं बलरामपुर में विनियर के उत्पाद, विन्ध्य क्षेत्र के मिर्जापुर व सोनभद्र में बांस और उससे बने वस्तु के अलावा रॉक पेंटिंग (चट्टानों पर कलाकृतियां) तथा वाराणसी के सारनाथ तथा बरेली स्थित मिनी जू को अब तक चिन्हित किया जा चुका है। इसके अलावा जैव विविधता के संरक्षण आधार पर भी वेटलैण्ड, जंगलों व उसके पास के 300 से अधिक गांवों को भी चिन्हित किया जा चुका है। ताकि गांवों में ग्रामीणों के घरों को ही गेस्ट रूम के रूप में विकसित किया जा सके। जानकार बताते हैं कि पर्यटन विभाग, वन विभाग तथा उत्तर प्रदेश वन निगम की एक संयुक्त टीम प्रदेश में ईको टूरिज्म को विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस टीम ने प्रदेश में ईको टूरिस्ट स्पॉट के रूप में प्रदेश के अलग-अलग इलाको के स्थलों को चिन्हित कर वहां ईको टूरिज्म से जूड़ी मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की संस्तुति सरकार से की है। ईको टूरिज्म के लिए चिन्हित प्रदेश भर में प्रमुख स्थल 1. काशी वन्यजीव विहार, चन्दौली 2. वखीरा वन्यजीव विहार, संतकबीर नगर 3. अमानगढ़ टाइगर रिजर्व, बिजनौर 4. कैमूर फासि्ल्स, सोनभद्र 5. सल्खन डायनासोर पार्क, सोनभद्र 6. देवगढ़ वन्यजीव विहार, ललितपुर 7. कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार, बहराइच 8. दुधवा नेशनल पार्क लखीमपुर खीरी 9. किशनपुर वन्यजीव विहार, लखीमपुर खीरी 10. कुकरैल पुनर्वास केन्द्र, लखनऊ इसके अतिरिक्त प्रदेश के सभी 26 पक्षी विहार तथा 300 से अधिक बड़े वेटलैण्ड को भी ईको टूरिज्म के लिए चिन्हित किया गया है। विदित हो कि प्रदेश में 1,35,000 वेटलैंड अधिसूचित हैं।