शारदीय नवरात्र कल से शुरू, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि
भोपाल। मां दुर्गा की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होने वाले इस नौ दिवसीय पर्व में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के पहले दिन घरों और दुर्गा पंडालों में घटस्थापना के साथ पूजा की शुरुआत होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के दौरान विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करने से पूजा का शुभारंभ किया जाता है। इस बार घटस्थापना के लिए बताए गए मुहूर्त इस प्रकार हैं:
घटस्थापना का शुभ समय: सुबह 8:05 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
चंचल बेला: सुबह 8:05 बजे से 9:31 बजे तक
अमृत बेला: सुबह 9:31 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि अवश्य कर लें।
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
धार्मिक मान्यताओं में नवरात्र के आरंभ और समापन के दिन के आधार पर मां दुर्गा के वाहन का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, रविवार या सोमवार को नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जाता है। इस आधार पर इस वर्ष मां दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता बताई जा रही है।
धार्मिक परंपराओं में हाथी को सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और कृषि में उन्नति का प्रतीक माना जाता है। वहीं, नवरात्र के समापन और देवी के प्रस्थान से जुड़ी मान्यताएं भी सप्ताह के दिन के आधार पर निर्धारित की जाती हैं।
नवरात्र की प्रमुख तिथियां
11 अक्टूबर: घटस्थापना और नवरात्र का पहला दिन
18 अक्टूबर: महाष्टमी व्रत
20 अक्टूबर: व्रत पारण और नवरात्र समापन से संबंधित तिथि
व्रत रखने वाले श्रद्धालु पारण का समय और अष्टमी-नवमी की तिथि अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार जरूर जांच लें।
घटस्थापना के लिए जरूरी पूजा सामग्री
कलश स्थापना से पहले पूजा की सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लेना अच्छा रहता है। इसके लिए मुख्य रूप से इन वस्तुओं की जरूरत होती है:
मिट्टी या तांबे का कलश
गंगाजल या स्वच्छ जल
नारियल और लाल कपड़ा
आम या अशोक के पत्ते
सुपारी, सिक्का, अक्षत और दूर्वा
जौ के बीज और मिट्टी का पात्र
मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर
लाल कपड़ा, रोली, कुमकुम, फूल और दीपक
घटस्थापना की पूजा विधि
1. पूजा स्थल की सफाई करें: सबसे पहले घर के पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें और लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
2. मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें: चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत करें।
3. कलश तैयार करें: मिट्टी या तांबे के कलश में स्वच्छ जल भरें। उसमें सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल ऊपर स्थापित करें।
4. जौ बोएं: एक साफ पात्र में मिट्टी भरकर जौ के बीज बोएं। नवरात्र के नौ दिनों तक इसमें आवश्यकतानुसार पानी डालें और अंकुरों की देखभाल करें।
5. मां दुर्गा की पूजा करें: घटस्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें, मंत्रों का जाप करें और फूल, फल, मिठाई तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
नवरात्र के नौ दिनों में भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार व्रत रखते हैं और मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भी विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
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