स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मो. सुलेमान ने कोरोना के संक्रमण-निदान को लेकर कामों की जानकारी दी
भोपाल, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मो. सुलेमान ने कहा है कि कोरोना संक्रमण को रोकना और संक्रमित व्यक्ति का त्वरित उपचार करना सरकार की प्राथमिकता है। इसमें सबसे गंभीर मामला मौतों का है। शुरू में हमारी डेथ रेट 10 प्रतिशत थी लेकिन इसकी जानकारी हमें नहीं थी कि मौत रोकने के लिए हमें क्या करना है? अप्रेल में डेथ आडिट से पता चला कि मरीज देर से अस्पताल पहुंच रहे हैं। इस कारण यह स्थिति बन रही है, इसलिए समय रहते संक्रमित व्यक्ति की पहचान कर आईडेंटिफाई, आइसोलेट टेस्ट एंड स्ट्रीट की रणनीति पर काम किया जा रहा है। अब डेथ रेट 2.3 प्रतिशत हो गई है। जब यह वायरस सामने आया तब अप्रेल में हालात ऐसे थे कि लोग अपने लक्षणों को छिपाते थे लेकिन अब खुद आकर अपनी जांच करा रहे हैं। इसके लिए हमने सार्थक लाइट एप बनाया है। इसमें लक्षण दर्ज करने पर सरकार को पता चलता है कि संदिग्ध लक्षण वाला व्यक्ति है और उसकी जांच कराई जाती है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कोरोना के डेटा शेयरिंग और इससे निपटने की रणनीति की जानकारी दी गई। इस दौरान एनएचएम की एमडी छवि भारद्वाज ने इस मौके पर कहा कि 18 मई को कोरोना की रिवाइज गाइडलाइन जारी हुई है। इस मौके पर जनसंपर्क आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े भी मौजूद रहे। इसमें फर्स्ट कांट्रेक्ट वाले व्यक्ति की पांच से दस दिन में जांच की जाने की बात कही गई है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक अगर किसी देश में संक्रमण की दर पांच प्रतिशत से कम रहती है तो यह संतोष जनक है।
एम्स के डायरेक्टर डॉ. सरमन सिंह ने एसएआरआई और आईएलआई के लक्षणों की जानकारी देते हुए कहा कि आईएलआई में सामान्य सर्दी, जुकाम जैसे लक्षण होते हैं लेकिन रेस्पिरेटरी इंफेक्शन नहीं होता है। इसके विपरीत एसएआरआई के मरीज में सर्दी, जुकाम के साथ सांस लेने में तकलीफ और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का असर दिखाई देता है। डॉ सिंह ने कहा कि संक्रामक बीमारियों में 110 दिन के बाद हालात कंट्रोल नहीं होते तो इसका प्रसार तेजी से बढ़ जाता है। हम पीक का इंतजार नहीं कर सकते, इसको रोकने के प्रयास लगातार जारी हैं।